सुषमा जी, मेरी मदद करो। मेरे बच्चे को बचा लो। वह पायलट बनने फिलीपींस गया था, लेकिन किसी मामले में फंसकर पांच साल से वहां की जेल में बंद है। दो साल से उसका कुछ पता नहीं है। यूपी के फतेहपुर की रहने वाली मां मनोरमा सिंह का यह कहते हुए गला भर आया।
सरकार से पांच साल से गुहार लगा रही इस मां की अभी तक किसी ने नहीं सुनी है। बेटे की वापसी के लिए वह दर-दर भटक रही हैं। दून में भाजपा के प्रशिक्षण वर्ग में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज या भाजपा के बड़े नेताओं से मिलने की आस में आईं, लेकिन निराश लौट गईं।
करीब सात वर्ष पहले मृगेंद्र फिलीपींस में पायलट बनने गया था। वहां से 11 अप्रैल 2012 को पुलिस का एक पत्र परिजनों के पास पहुंचा। इसमें पूरी जानकारी दी गई थी कि किस तरह मृगेंद्र जेल में बंद है। पत्र पढ़कर परिवार में कोहराम मच गया।
मानसिक बीमार हो गए पिता
पिता अर्जुन सिंह को तो इतना सदमा लगा कि वह मानसिक बीमार हो गए। मां अब दर-दर भटक रही है। जवान बेटा अनजान देश की जेल में बंद है। उसने 17 अप्रैल को माता-पिता के नाम एक पत्र लिखा था, जिसमें कहा था कि वह गलत तरीके से फंस गया है।
वह निर्दोष है। अगर कोई मदद करेगा तो वह जेल से छूट जाएगा। मां ने भारतीय उच्चायोग से संपर्क किया, लेकिन कोई हल नहीं निकला। मां से रहा नहीं गया तो करीब तीन वर्ष पूर्व पहुंच गईं फिलीपींस।
बेटे से मिलीं तो जरूर, लेकिन उसे जेल से निकाल नहीं पाईं। मनोरमा सिंह ने बताया कि दो साल से उनके बेटे का कुछ अता-पता नहीं है। वह कई बार विदेश मंत्रालय से मदद मांग चुकी हैं। मृगेंद्र की मां का कहना है कि सरकार तो साथ नहीं दे रही, शायद भगवान ही कुछ मदद कर दें।
लिहाजा हरिद्वार में मां गंगा की शरण में आईं थी। वहां किसी ने बताया कि देहरादून में भाजपा के बड़े-बड़े नेता एकत्र हो रहे हैं। इस आस में देहरादून चली आईं कि हो सकता है विदेश मंत्री सुषमा स्वराज या भाजपा का कोई बड़ा नेता मिल जाए, जो मदद करे, लेकिन यहां भी निराशा हाथ लगी। भटकते-भटकते उनकी मुलाकात अमर उजाला रिपोर्टर से हुई। उनकी मांग है कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज इतने लोगों की मदद करती हैं तो मेरे बेटे की भी मदद करें।
कौन है मृगेंद्र
मृगेंद्र पायलट बनने का खास सपना रखने वाला होनहार युवा है। उसने 10वीं, 12वीं करने के बाद बीकॉम किया। 12वीं के बाद दो बार एनडीए का एग्जाम क्वालिफाई किया, लेकिन एसएसबी में बाहर हो गया। मृगेंद्र को पायलट बनने का बचपन से ही क्रेज था। एनसीसी एयर विंग सी सर्टिफिकेट धारक मृगेंद्र ने ऑल इंडिया वायु सैनिक कैंप में 2003 में बंगलूरू में यूपी का प्रतिनिधित्व किया।
इसके अलावा ऑल इंडिया वायु सैनिक कैंप में माइक्रोलाइट पायलट के तौर पर उसका चयन हुआ। दो साल का फ्लाइट एंड ऑपरेटिंग अनुभव भी है। मृगेंद्र ने कंट्रोल लाइन एयरोबेटिक्स, आरसी पावर और आरसी ग्लाइडर में तीन गोल्ड मेडल जीते। 2005 में गणतंत्र दिवस परेड में भी हिस्सा लिया था। जब इंडिया में पायलट नहीं बन पाया तो अपना ख्वाब पूरा करने वह फिलीपींस गया था।
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