मंजूर हुई थी छुट्टी, मां से मिलने आने वाले थे निशांत
प्रोमिला चौधरी कहती हैं, बेटा उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार था। दुनिया का कोई भी पुरस्कार बेटे की मौत का गम दूर नहीं कर सकता। विमान क्रैश होने से एक दिन पहले ही निशांत ने कहा था कि उसे छुट्टी मिल गई है। वह देहरादून आने वाला है। बेटा तो नहीं आया, पर उसकी मौत की खबर ने उनके जीने का इकलौता सहारा भी छीन लिया। प्रोमिला बताती हैं, मौत से चार महीने पहले ही बेटे की शादी हुई थी। वह देहरादून में अकेली रहती थीं तो बेटा अपने पास बुलाता था। इस पर वह कहती थीं कि पूरी जिंदगी तेरे पास ही रहना है। उन्हें क्या पता था कि बेटा इस तरह छोड़कर चला जाएगा।
दो साल की उम्र से ही पायलट बनना चाहते थे निशांत
प्रोमिला के पति नौसेना में इंजीनियर थे। निशांत दो साल की उम्र में ही आसमान में हेलीकॉप्टर उड़ते देख कहते थे कि वह पायलट बनेंगे। 12वीं से पहले ही निशांत का नौसेना में चयन हो गया था। उनकी शुरुआती पढ़ाई मुंबई से हुई। इसके बाद परिवार कुछ साल के लिए गोवा शिफ्ट हो गया था। निशांत ने हाईस्कूल और इंटर की पढ़ाई विशाखापट्टनम से की थी।
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दूसरों से मिली अवार्ड की जानकारी
प्रोमिला कहती हैं, निशांत को यह अवार्ड मिलने की जानकारी उसके दोस्त ने फोन पर दी। उन्होंने सरकार से गुजारिश कर कहा कि हर महीने कुछ आर्थिक मदद दी जाए ताकि वह अपना भरण-पोषण कर सकें। पति से उनका तलाक हो चुका है। बेटा ही उनका सहारा था।