तब एनएसजी से इन मिसाइलों को निष्क्रिय करने के लिए संपर्क साधा गया था, लेकिन बजट स्वीकृत न होने से मामला ठंडे बस्ते में चला गया। एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने चार दिसंबर 2017 को पीएचक्यू को पत्र लिखा। शासन से स्वीकृति व बजट अवमुक्त होने के बाद इन मिसाइलों को नष्ट करने के लिए सेना के मुख्यालय से संपर्क किया गया। इसके लिए केंद्रीय आयुध भंडार से इलेक्ट्रिक डेटोनेटर कार्ड डेटोनेटिंग, टीएनटी स्लैब, पीईके व सेफ्टी फ्यूज खरीदे गए थे।
पतरामपुर चौकी में दबाई गई मिसाइलों का स्थल चयनित करने के लिए बम निरोधक दस्ते की टीम ने मिसाइल खोजने के लिए गलत स्थान पर खुदाई कर दी। दरअसल 10 वर्ष साल पहले जिन पुलिस अधिकारियों व कर्मियों की मौजूदगी में मिसाइलें दबाई गई थी, उनका स्थानांतरण हो चुका है जबकि कई सेवानिवृत्त भी हो गए है। सटीक स्थल की जानकारी जुटाने के लिए पुलिस कर्मी तत्कालीन पुलिस अधिकारियों को फोन मिलाते रहे। बाद में जानकारी मिलने पर सेना की टीम ने खुदाई शुरू की।
पतरामपुर चौकी से हजीरों स्थित फीका क्षेत्र की दूरी करीब पांच किमी है। आसपास के गांवों और झालों को खाली कराया जा रहा है। एहतियातन एक किमी परिधि क्षेत्र को नो मैंस जोन घोषित कर दिया गया है। मिसाइलों को डंपर से मिट्टी के बैग में कवर कर के ले जाया जाएगा। एक दिन में जितनी मिसाइलें बाहर निकाली जाएगी, उसी दिन उन्हें निष्क्रिय कर दिया जाएगा। इसके लिए कोसी क्षेत्र में स्थल चयनित किया गया है। बृहस्पतिवार को मौसम खराब होने के चलते मिसाइलें निकालने का काम रोकना पड़ा।
- डॉ. जगदीश चंद्र, एएसपी