बताया जा रहा है कि वायु, थल एवं जल सेना के बीच बेहतर तालमेल के उद्देश्य से यह अभ्यास कराया जा रहा है। इसमें चीन सीमा से सबसे निकटवर्ती चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी को एडवांस लैंडिंग सेंटर के तौर पर इस्तेमाल के लिए परखा जा रहा है। एक हफ्ते पहले ही वायु सेना ने यहां अत्याधुनिक मशीनों से सुसज्जित वैन के माध्यम से एयर ट्रैफिक कंट्रोल की व्यवस्था कर ली थी।
मंगलवार सुबह सेना के हेलीकॉप्टरों ने हर्षिल हेलीपैड पर उतरकर सेना के पैरा कमांडोज को लिफ्ट किया। यहां से उन्हें चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी पर छोड़ा गया, जहां से वायुसेना के मल्टीपरपज एयरक्राफ्ट एएन-32 से इन पैरा कमांडोज को लिफ्ट कर पिथौरागढ़ उतारा गया। इस तरह के तीन राउंड में करीब 60 जवानों को लिफ्ट किया गया।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अभी यह अभ्यास 3-4 दिन चलना है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि इस अभ्यास को लेकर सेना की ओर से प्रशासन को सूचना दी गई है। यह पूरी तरह सेना का अपना अभियान है। इसमें स्थानीय प्रशासन की कोई भूमिका नहीं है।
वहीं, डोईवाला में सिरसा एयरबेस से जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर आए सुखोई-30 विमानों ने मंगलवार को भी एक घंटे का अभ्यास किया। लड़ाकू विमानों की आवाजों से आसपास के क्षेत्रों में कौतुहल बना रहा।
वायुसेना के लड़ाकू विमान सुखोई 30 विमानों ने जौलीग्रांट और डोईवाला के आसपास के इलाकों में तेज आवाजों के साथ एक घंटे की उड़ान भरी। दोपहर में करीब दो बजे के आसपास जौलीग्रांट एयरपोर्ट से लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरी। तेज गड़गड़ाहट के साथ विमान आसमान में पहुंचे तो लोग एकाएक उनको देखते ही रह गए।
आसमान में एक घंटे तक सफलतापूर्वक उड़ान भरने के बाद सुखोई विमान वापस एयरपोर्ट पर आकर खड़े हो गए। बताया गया कि लड़ाकू विमानों के उड़ानों का ट्रायल किया जा रहा है। एयरपोर्ट निदेशक विनोद शर्मा ने बताया कि मंगलवार को सुखोई विमानों ने एक घंटे का सामान्य उड़ान का अभ्यास किया।