तीन साल एनडीए में ग्रेजुएशन करने के बाद वह छह माह इलाहाबाद, छह माह हैदराबाद ट्रेनिंग में चले गए। 16 दिसंबर 1995 में वह एयर फोर्स के फ्लाइंग ब्रांच में पायलेट के तौर पर कमीशंड हुए थे।
वर्तमान में वह एयर फोर्स स्टेशन श्रीनगर में तैनात हैं। वह पिछले 25 सालों से वायु एरिया की हिफाजत में लगे हुए हैं। यशपाल उन चुनिंदा अफसरों में शामिल हैं, जिन्होंने बालाकोट में हुए सर्जिकल स्ट्राइक की पूरी प्लानिंग की थी।
वह एक कॉम्बेट पायलेट हैं जो वायु सेना में फाइटिंग भी करते हैं, मिसाइल भी छोड़ते हैं और पूरी रणनीति भी तैयार करते हैं। वायु सेना दिवस पर दो-दो मेडल लेकर न केवल उन्होंने अपने माता-पिता का नाम बल्कि उत्तराखंड का नाम भी ऊंचा किया है।