वायुसेना से रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन सुरेंद्र रावत का कहना है कि वह 1989 में वायुसेना में भर्ती हुए थे। उस समय वायुसेना का आधुनिकीकरण किया जा रहा था। उनकी पहली तैनाती लद्दाख में हुई थी। लद्दाख में सबसे बड़ा दुश्मन मौसम है।
वहां 40 फीसदी कम आक्सीजन के बीच रहना पड़ता है। अपने सेवाकाल में उन्होंने भूटान बार्डर से लेकर पंजाब, उत्तर पूर्व गुवाहाटी में नौकरी की। भूस्खलन और बाढ़ के समय आम जनता के जीवन को बचाया।
2012 में वह अमेरिका में प्रशिक्षण लेने के लिए गए थे। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेवा वर्तमान समय में अमेरिका और रूस के बाद विश्व की तीसरी अनुशासित सेना बन गई है। यदि वायुसेना को आवश्यकता होगी तो वह सेवा देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।