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इंडो-नेपाल बॉर्डर के पिलर डिजाइन करेगा भारत, ड्रोन से होगी सरहद की निगहबानी

Thu, 31 Aug 2017 12:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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इंडो-नेपाल बॉर्डर पर सीमांकन के लिए लगाए जाने वाले पिलर्स भारत डिजाइन करेगा। साथ ही भारत-नेपाल मिलकर सरहद की निगरानी और सख्त करेंगे। यह तय हुआ है इंडो-नेपाल बाउंड्री ग्रुप (बीडब्ल्यूजी) की तीन दिवसीय बैठक में।
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बुधवार को चौथी बैठक यहां संपन्न हो गई। दोनों देशों के महासर्वेक्षकों ने विभिन्न बिंदुओं पर सहमति के बाद दस्तावेज पर दस्तखत किए। बीडब्ल्यूजी की पांचवीं बैठक अगले साल नेपाल में होगी।

इंडो-नेपाल बॉर्डर ग्रुप की चौथी बैठक में दोनों देशों के बीच सीमांकन से संबंधित कार्यों के लिए पांच साल का प्लान तैयार किया गया। सरहद के कार्यों को इन सालों में पूरा किया जाना है। भारत के महासर्वेक्षक मेजर जनरल वीपी श्रीवास्तव ने बताया कि पिलर्स की डिजाइन देश में तैयार की जाएगी।
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पिलर्स सीमा सशस्त्र बल (एसएसबी) लगाएगा। जहां जरूरत होगी वहां पिलर्स को मजबूती देने के लिए डिजाइन में हल्का फेर-बदल भी किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि बैठक में कार्यों को पूरा करने के प्लान पर सहमति हो गई है।
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नो मेंस लैंड क्षेत्र में अतिक्रमण को लेक‌र हुआ फैसला

बैठक में तय हुआ कि आपसी सहयोग से सीमा का प्रबंधन किया जाएगा। इस मौके पर कहा गया कि जो लोग सरहदी क्षेत्र में रहते हैं, उन्हें अंतरराष्ट्रीय सीमा के प्रबंधन के संबंध में जागरूक किया जाएगा। इसके साथ ही सीमांकन कार्य करने में उनका सहयोग लिया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नो मेंस लैंड क्षेत्र में अतिक्रमण न होने देने के लिए एहतियात बरता जाएगा। बीडब्ल्यूजी में सीमा सुरक्षा के मामले में गंभीरता से मंथन किया गया। सरहद की जमीन और आसमान दोनों से निगरानी की जाएगी। इसके लिए ड्रोन आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है। नेपाल से आए अधिकारियों के प्रतिनिधि मंडल की अगुवाई सर्वे डिपार्टमेंट के महानिदेशक गणेश प्रसाद भट्ट ने की।

सर्वे कमेटी की बैठक 15 सितंबर को
इंडो-नेपाल बॉर्डर ग्रुप की बैठक के बाद अब सर्वे कमेटी की बैठक 15 सितंबर को देहरादून में होगी। ग्रुप की बैठक में सरहदी क्षेत्र में सीमांकन के लिए जो निर्णय लिए गए हैं। उन पर पहले सर्वे कार्य शुरू किया जाएगा। इसमें सर्वे के संबंध में अगली रणनीति तय की जाएगी।
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