दोनों देशों के बीच बढ़ रहे तनाव के बीच चंपावत जिला प्रशासन की पहल पर दोनों देशों के अफसर चार अगस्त को बैठक करेंगे। चंपावत एसपी लोकेश्वर सिंह ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नेपाल की ओर से कंचनपुर जिले के अफसर बैठक में शामिल होंगे। इधर डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय ने उम्मीद जताई है कि नो मैंसलैंड पर अतिक्रमण विवाद बातचीत के जरिए सुलझ जाएगा।
भारत-नेपाल सीमा में टनकपुर से लगे नो मेंसलैंड क्षेत्र में नेपाल की ओर से हुए अतिक्रमण मसले पर बातचीत के लिए दोनों देशों के अफसरों के बीच होने वाली बैठक की तिथि आखिर तय हो गई है। एसपी लोकेश्वर सिंह ने बताया कि बैठक में एसएसबी के अधिकारी भी शिरकत करेंगे।
बैठक सीमांत क्षेत्र में होगी, मगर यह किस स्थान होगी, इसका औपचारिक एलान नहीं किया गया। माना जा रहा है कि टनकपुर में नेपाल सीमा से लगे नो मेंसलैंड का मौका मुआयना करने के बाद होने वाली बैठक का स्थल टनकपुर हो सकता है। आमतौर पर नेपाल के अधिकारियों के साथ होने वाली बैठकें बनबसा में होती रही हैं।
चीन की ओर से सीमा पार चल रही गतिविधियों को देखते हुए अलर्ट भारतीय सुरक्षा बलों ने लिपुलेख सीमा पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हैं। चीन सीमा पर किसी भी हालात से निपटने के लिए भारतीय सेना और भारत तिब्बत सीमा पुलिस के जवानों की पर्याप्त संख्या में तैनाती की गई है।
लद्दाख में तनातनी के समय तीन माह पूर्व चीनी सैनिकों ने लिपुलेख में भी भारत की ओर झंडे लहराकर चौकियां हटाने की चेतावनी दी थी। सीमा पार चीनी सैनिकों के जमावड़े की सूचना के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने वहां पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर दी थी।
सूत्रों के अनुसार चीन सीमा पर भारतीय सुरक्षा बलों के जवानों की पर्याप्त संख्या में वहां पर तैनाती है। सुरक्षा बलों के जवान दिन और रात लगातार सीमा पर गश्त कर रहे हैं। रात को नाइट विजन कैमरों से सीमा की निगरानी की जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि भारत की ओर से सीमा पर सैन्य बल की संख्या बढ़ाने के बाद से चीन की ओर से कोई हरकत दोबारा नहीं की गई है। इधर, नेपाल सीमा पर धारचूला से लेकर कालापानी तक सशस्त्र सीमा बल के जवान नजर रखे हुए हैं। बल के अधिकारियों के अनुसार इस समय सीमा पूरी तरह से शांत है।
पिथौरागढ़ जिले के लिपुपास में भारत-चीन की सीमाओं का विभाजन होता है। कैलाश यात्रा और भारत चीन व्यापार भी इसी दर्रे से होकर होता रहा है। पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले यात्री और व्यापारी लिपुपास से ही चीन में प्रवेश करते हैं। इस वर्ष कोरोना के कारण कैलाश यात्रा और भारत चीन व्यापार नहीं हो सका।