कोयले के इस्तेमाल की 25 सालों की छूट के बावजूद भारत ने इतनी तैयारी कर ली है कि वह जितना कार्बन उत्सर्जन करेगा उससे कई गुना अधिक सोखेगा। जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों पर अंकुश लगाने के लिए भारत ने सिर्फ विश्व गुरु की भूमिका में मशविरा ही नहीं दिया, बल्कि सबसे पहले उस पर अमल भी शुरू किया है।
देश भर में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे ग्रीन गलियारे बनाने की दिशा में काम शुरू होने जा रहा है। इसके लिए धनराशि आवंटित हो चुकी है। इसके साथ ही वनीकरण के कार्यक्रम पर भी काम शुरू हो गया है।
पेरिस सम्मेलन में विकसित देशों को 25 साल तक के लिए जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल की छूट मिली थी। भारत अभी प्रति व्यक्ति सालाना 1.6 टन कार्बन उत्सर्जन करता है, जबकि एक अमेरिकी का प्रति व्यक्ति सालाना 16.4 टन कार्बन उत्सर्जन है। विश्व का प्रति व्यक्ति औसत 4.9 टन निकलता है।
देश में बनने लगे राष्ट्रीय राजमार्ग ग्रीन गलियारे
भारत में वनीकरण की स्थिति के लिए काम कर रही भारतीय वन अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के विज्ञानियों का दावा है कि जो कार्ययोजना अमल में लाई जा रही है उससे भारत तीन बिलियन टन अतिरिक्त कार्बन सोखेगा। यानी, भारत पहला देश होगा जो दूसरे देशों का उत्सर्जित कार्बन भी सोखेगा। अभी दुनिया केदेश अपने यहां उत्सर्जित कार्बन से निपटने की ही योजना बना रहे हैं।
परिषद के वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. वीआरएस रावत ने बताया कि देश में एक लाख 40 हजार किमी राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों तरफ ग्रीन गलियारे बनाए जा रहे हैं।
उत्तराखंड में चारधाम रूट, पिथौरागढ़, मानसरोवर रूट समेत अन्य राज्यमार्गों के किनारे ग्रीन गलियारे के लिए धन आवंटित कर दिया गया है।
वन विभाग भी इस कार्ययोजना में शामिल
इसके साथ ही सामुदायिक वानिकी, वन पंचायतों आदि प्रोजेक्टों, कार्ययोजनाओं में वनीकरण को शामिल करने के आदेश कर दिए गए हैं। इस तरह फोरेस्ट कवर बढ़ाने के साथ वनों का घनत्व भी बढ़ाया जा रहा है।
राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों किनारों पर ग्रीन गलियारे के लिए धन का आवंटन शुरू हो गया है। पहली बार वन विभाग को भी इस कार्ययोजना में शामिल किया गया है। इस तरह राष्ट्रीय राजमार्ग केसाथ ही ग्रीन गलियारे और वनीकरण का काम होगा।
-पीके मौर्य, उत्तराखंड प्रोजेक्ट प्रभारी, सड़क, परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय