इससे पूर्व 1962 की लड़ाई के कारण चीन के साथ लिपुलेख दर्रे से होने वाला व्यापार 30 साल तक बंद रहा। हालात सामान्य होने पर 1992 में व्यापार दोबारा शुरू हुआ। भारत-चीन व्यापार समिति के संरक्षक पदम रायपा, उपाध्यक्ष दिनेश गुंज्याल और महासचिव दौलत सिंह रायपा ने बताया कि 30 साल तक भारत का व्यापार चीन के साथ बंद रहा, जबकि नेपाल से व्यापार चलता रहा।
उपाध्यक्ष दिनेश गुंज्याल ने बताया कि इस वर्ष व्यापार बंद होने से सीमांत के लगभग 250 से अधिक व्यापारियों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। भारत चीन व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन रौंकली ने बताया कि प्रतिवर्ष लगभग 250 व्यापारी और हेल्पर चीन जाते हैं। लगभग चार से पांच करोड़ रुपये के सामान का आयात-निर्यात होता है। इस साल सभी व्यापारी और हेल्पर बेरोजगार रह गए।
यातायात नहीं होने से कभी गुंजी नहीं आए चीनी व्यापारी
भारत-चीन व्यापार में केवल भारतीय व्यापारी ही चीन की मंडी तकलाकोट जाते रहे हैं। व्यापार के लिए भारत ने 10 हजार फीट की ऊंचाई पर गुंजी में मंडी का निर्माण किया था, लेकिन भारतीय क्षेत्र में यातायात की सुविधा न होने से चीनी व्यापारियों ने कभी यहां का रुख नहीं किया। भारतीय मंडी गुंजी में व्यापारियों की सुविधा के लिए कस्टम कार्यालय, भारतीय स्टेट बैंक की अस्थायी शाखा खोली जाती है।
वर्ष जारी पास आयात निर्यात
2016 - 195 5.21 करोड़ - 75.95 लाख
2017 - 195 7.34 करोड़ - 86.42 लाख
2018 - 244 5.34 करोड़ - 86.82 लाख
2019 - 265 1.91 करोड़ - 1.25 करोड़
भारत चीन व्यापार में प्रति वर्ष 300 ट्रेड पास मंगाए जाते हैं। इस वर्ष कोरोना महामारी और सीमा में चल रहे विवाद के कारण विदेश मंत्रालय से व्यापार की अनुमति नहीं मिली। पिछले साल 265 ट्रेड पास जारी हुए थे। 1.92 करोड़ का आयात और 1.26 करोड़ रुपये के सामान का निर्यात हुआ था।
- अनिल कुमार शुक्ला, ट्रेड अधिकारी एवं उपजिलाधिकारी धारचूला।