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केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग की पहल, स्थानीय युवाओं को देगा बर्ड वॉचिंग का प्रशिक्षण

Wed, 28 Oct 2020 07:58 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपेश्वर(चमोली)

सार

  • टूरिस्ट को पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियों के बारे में बताएंगे गाइड
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार देने के लिए केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग स्थानीय युवाओं को बर्ड वॉचर का प्रशिक्षण देगा। इसके तहत वन विभाग चयनित गाइडों को बर्ड वॉचर का प्रशिक्षण देगा। यह बर्ड वॉचर टूरिस्ट को पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियों के बारे में जानकारी देंगे।

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केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग उत्तराखंड का सबसे बड़ा संरक्षित वन क्षेत्र है। यह 975.2 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। केदारनाथ सेंचुरी एरिया में दुर्लभ वन्य जीवों के साथ ही विभिन्न प्रजाति की 49 पक्षी हैं। चोपता व कांचुलाखर्च में ग्रीफन वल्चर (गिद्द) भी पाया जाता है, जो मौजूदा समय में विलुप्तप्राय है।

साथ ही यहां राज्य पक्षी मोनाल, चीड़ फिजेंट, खलिज फिजेंट, कोकलॉस सहित पक्षियों की कई प्रजातियां विचरण करती रहती हैं। चमोली जिले के मंडल घाटी व रुद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ क्षेत्र के युवा साहसिक पर्यटकों व ट्रेकरों के साथ गाइड का काम करते हैं। वे पर्यटकों को यहां के धार्मिक, पर्यटन, जलवायु, वन्य जीवों व पेड़-पौधों के बारे में बताते हैं।

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देश में 21वें स्थान पर है केदारनाथ सेंचुरी एरिया

केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग ने सीपी भट्ट, पर्यावरण एवं विकास केंद्र दशोली की मदद से इन गाइडों को बर्ड वॉचर का प्रशिक्षण देने की योजना बनाई है। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के उपवन संरक्षक अमित कंवर ने बताया कि स्थानीय युवाओं को बर्ड वॉचर का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे उन्हें रोजगार भी मिलेगा।

केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग का सेंचुरी एरिया भारतवर्ष में 21वें स्थान पर है। गोपेश्वर के मंडल से लेकर केदारनाथ मंदिर के चौखंबा तक केदारनाथ सेंचुरी क्षेत्र फैला हुआ है। यहां कई प्रकार के दुर्लभ वन्य जीव विचरण करते रहते हैं।
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