इस युद्ध के बाद भारत-तिब्बत व्यापार पूर्ण रूप से बंद हो गया। युद्ध से पहले भारत और तिब्बत व्यापार की सबसे बड़ी मंडी बाड़ाहोती ही थी। इस स्थान को चीन अपनी सीमा बताने की हमेशा कोशिश करता रहता है।
बाड़ाहोती बुग्याल करीब 10 किमी से अधिक है। बाड़ाहोती क्षेत्र में होतीगाड़ नदी बहती है, जो भारत के निचले क्षेत्र में आकर धोलीगंगा में मिल जाती है और इसका बदरीनाथ हाईवे पर विष्णुप्रयाग में अलकनंदा में विलय हो जाता है। बाड़ाहोती में दूर-दूर तक फैले बुग्याल और चट्टानी भाग हैं।
तीन सीमा पोस्ट पर हथियार ले जाने की इजाजत नहीं
वर्ष 1962 की जंग के बाद आईटीबीपी के जवान बाड़ाहोती क्षेत्र में बंदूक की नली नीचे रखकर गश्त लगाते थे। वर्ष 2000 में तय हुआ कि भारत के सैनिक देश की तीन सीमा पोस्टों पर हथियार साथ नहीं रखेंगे। ये पोस्ट हैं-उत्तराखंड की बाड़ाहोती, हिमाचल प्रदेश की करौली और शिपकी। यहां आईटीबीपी के जवान सिविल ड्रेस में गश्त लगाते हैं।