भारतीय गणतंत्र की प्रतीक 26 जनवरी स्वतंत्र भारत में ही नहीं बल्कि गुलाम भारत में भी मनाया जाता था। इस लिहाज से इस वर्ष देश 26 जनवरी की 84वीं वर्षगांठ मना रहा है। आमतौर पर इस वर्षगांठ को 64वीं माना जाएगा।
संपूर्ण स्वराज्य की घोषणा
आजादी मिलने से पूर्व भी 26 जनवरी अविभाजित हिंदुस्तान में मनाया जाता था। वास्तव में 26 जनवरी 1930 को महात्मा गांधी ने लाहौर में लाला लाजपत राय, अब्दुल कलाम आजाद, नेताजी सुभाषचंद्र बोस आदि की उपस्थिति में संपूर्ण स्वराज्य की घोषणा की थी।
26 जनवरी 1931 को पुण्य पर्व के रूप में इस घोषणा की वर्षगांठ मनायी गई। फिर 1947 में आजादी मिलने तक समूचे देश में हिंदुस्तानवासी 26 जनवरी को अपने राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाने लगे। अंग्रेजों ने इस पर कभी एतराज भी नहीं किया।
स्वाभिमान दिवस
शुरुआती वर्षों में पुण्य पर्व के रूप में मनायी जाने वाली 26 जनवरी 1938 से स्वाभिमान दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। इस दिन प्रतिवर्ष देशभर में संपूर्ण स्वराज्य पाने के कार्यक्रम कांग्रेस द्वारा चलाए जाते थे।
1947 में देश के आजाद होने के बाद प्रभुता संपन्न गणतंत्र की आधार शिला रखी जाने लगी। भारत के संविधान निर्माताओं ने संपूर्ण स्वराज्य की प्रतीक 26 जनवरी को ही गणतंत्र दिवस घोषणा के लिए चुना।
इस प्रकार आजाद भारत में भले ही हम भारतीय गणतंत्र की 64वीं वर्षगांठ 26 जनवरी को मना रहे हो लेकिन 26 जनवरी की 84वीं वर्षगांठ वास्तव में मनायी जा रही है।