इस बैठक में छावनी अधिनियमों में संशोधनों के अलावा छावनियां खत्म करने के बारे में रक्षा मंत्री, रक्षा राज्य मंत्री, छावनियों के सांसद, सात सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी के सदस्य हिस्सा लेंगे। कांग्रेस कार्यकर्ता हितेश शर्मा का कहना है कि मोदी सरकार का यह फैसला छावनियों के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। छावनी अधिनियम के कारण क्षेत्र में जनता से जुड़े कई विकास कार्य नहीं हो पाते।
लैंसडौन कैंट बोर्ड के उपाध्यक्ष दिनेश रावत का कहना है कि नगर का विकास छावनी अधिनियम के जटिल कानूनों में कैद होकर रह गया है। उन्होंने कहा कि छावनी अधिनियम को सरल बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
छावनी परिषद के सदस्य डा. एसपी नैथानी ने कहा कि छावनी अधिनियमों में वर्ष 1983 और वर्ष 2006 में दो बार संशोधन हुए। इन संशोधनों के माध्यम से निर्वाचित सदस्यों को पंगु बना दिया गया। दिल्ली की पांच जनवरी की बैठक में लोगोें को छावनी अधिनियम की जटिलताओं से राहत मिलने की उम्मीद जताई है।