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कंक्रीट का जंगल दून की आबोहवा में घोल रहा जहर

Fri, 17 Nov 2017 09:19 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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प्रदूषण
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वाहनों से निकलने वाले धुएं के साथ लगातार बढ़ रहा कंक्रीट का जंगल (कंस्ट्रक्शन) भी दून की आबोहवा में जहर घोल रहा है। अगर स्थिति पर जल्द ही नियंत्रण नहीं पाया गया तो हालात चिंताजनक होंगे। साफ-सुथरे शहर की छवि वाला अपना दून भी देश के अन्य शहरों की तरह प्रदूषित हो जाएगा। राजधानी में प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है।
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दून में बीते कुछ वर्षों में कंस्ट्रक्शन का काफी काम बढ़ा है। इससे उठने वाली धूल आदि के चलते वायु प्रदूषित हो रही है। वर्तमान की बात करें तो घंटाघर क्षेत्र में पर्टिकुलेट मैटर (पीएम 10) 193 है। वहीं, रायपुर क्षेत्र में यह आंकड़ा 208.68 पर्टिकुलेट मैटर है।

इसके अलावा आईएसबीटी क्षेत्र में पर्टिकुलेट मैटर 276.5 पहुंच गया है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो इसका लेवल 60 तक ही रहना चाहिए। लेकिन, राजधानी में यह लेवल तीन गुना से भी अधिक हो गया है। वैसे तो राजधानी के सभी इलाके वायु प्रदूषण की जद में हैं, लेकिन सबसे अधिक प्रदूषित घंटाघर, रायपुर रोड और आईएसबीटी क्षेत्र है।
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पांच वर्षों में बदल गया अपना दून

mountains
जीएमएस रोड निवासी फहद अंसारी दून की आबोहवा में घुलते प्रदूषण के जहर पर चिंता जताते हुए बताते हैं कि पांच वर्ष पहले दून काफी हरा-भरा था। शहर का वातावरण बेहद स्वच्छ था और प्रदूषण भी नहीं था, लेकिन अब देहरादून कंक्रीट में तब्दील हो गया है। जगह-जगह हो रहे कंस्ट्रक्शन के चलते यहां की वायु प्रदूषित होने लगी है।

यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में दून भी अन्य शहरों की तरह बेहद प्रदूषित हो जाएगा। दून की पहचान बचाने के लिए सरकार के साथ आम लोगों को भी जागरूक होना होगा।

कंस्ट्रक्शन वर्क से भी दून की आबोहवा प्रदूषित हुई है। इसके अलावा वाहनों की संख्या भी काफी बढ़ी है, जिससे निकलने वाला धुआं वातावरण को दूषित कर रहा है।
-एसएस राणा, क्षेत्रीय अधिकारी, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड
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