वाहनों से निकलने वाले धुएं के साथ लगातार बढ़ रहा कंक्रीट का जंगल (कंस्ट्रक्शन) भी दून की आबोहवा में जहर घोल रहा है। अगर स्थिति पर जल्द ही नियंत्रण नहीं पाया गया तो हालात चिंताजनक होंगे। साफ-सुथरे शहर की छवि वाला अपना दून भी देश के अन्य शहरों की तरह प्रदूषित हो जाएगा। राजधानी में प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है।
दून में बीते कुछ वर्षों में कंस्ट्रक्शन का काफी काम बढ़ा है। इससे उठने वाली धूल आदि के चलते वायु प्रदूषित हो रही है। वर्तमान की बात करें तो घंटाघर क्षेत्र में पर्टिकुलेट मैटर (पीएम 10) 193 है। वहीं, रायपुर क्षेत्र में यह आंकड़ा 208.68 पर्टिकुलेट मैटर है।
इसके अलावा आईएसबीटी क्षेत्र में पर्टिकुलेट मैटर 276.5 पहुंच गया है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो इसका लेवल 60 तक ही रहना चाहिए। लेकिन, राजधानी में यह लेवल तीन गुना से भी अधिक हो गया है। वैसे तो राजधानी के सभी इलाके वायु प्रदूषण की जद में हैं, लेकिन सबसे अधिक प्रदूषित घंटाघर, रायपुर रोड और आईएसबीटी क्षेत्र है।