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नोटबंदी के दौरान खाते में 2.5 लाख जमा करने वालों पर भी कसेगा आयकर का शिकंजा, पढ़ लें वरना पछताएंगे

Fri, 30 Nov 2018 08:20 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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Income Tax - फोटो : demo pic
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नोटबंदी के दौरान बैंक खाते में ढाई लाख जमा कराने वाले लोग आयकर विभाग की जांच की जद में आ गए हैं। मुख्य आयकर आयुक्त रजनी कांत गुप्ता ने कहा कि जो भी रुपये खाते में जमा किए गए हैं, उसका हिसाब देना ही होगा।

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बृहस्पतिवार को आयकर भवन में मुख्य आयकर आयुक्त रजनी कांत गुप्ता मीडिया से मुखातिब हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि आठ नवंबर-2016 को हुई नोटबंदी के बाद खातों में पैसा जमा कराने वालों की जांच प्रक्रिया चल रही है।

10 लाख रुपये से ऊपर जमा कराने वालों का वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद अब उनसे जवाब मांगा जा रहा है। उनकी रिटर्न फाइल की भी जांच कराई जा रही है। अब इस बीच खाते में ढाई लाख रुपये जमा कराने वालों का वेरिफिकेशन शुरू किया जा रहा है।

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20 लाख से कम दावेदारी वाले वादों में पैरवी नहीं करेगा आयकर विभाग

उत्तराखंड में सैकड़ों ऐसे खाते सामने आए हैं, जिनमें नोटबंदी के दौरान ढाई लाख रुपये से ऊपर पैसा जमा किया गया है। इन सभी खातों की आईटीआर की जांच पड़ताल की जा रही है। जांच में जो भी गड़बड़ी सामने आएगी, उसी हिसाब से आयकर विभाग नोटिस जारी करेगा और जवाब मांगेगा। 

20 लाख से कम टैक्स दावेदारी वाले मामलों में अब आयकर विभाग उलट फैसला आने के बाद आगे की लड़ाई नहीं लड़ेगा। केंद्र सरकार ने लगातार बढ़ रहे वादों के चलते यह बदलाव किया है। इसके तहत हाईकोर्ट में 50 लाख रुपये से कम और सुप्रीम कोर्ट में एक करोड़ रुपये से कम दावेदारी वाले मामलों में अब आयकर विभाग कानूनी लड़ाई नहीं लड़ेगा।

बृहस्पतिवार को आयकर भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्य आयकर आयुक्त रजनी कांत गुप्ता ने बताया कि सरकार के फैसले के बाद उत्तराखंड में ऐसे 77 मामलों से आयकर विभाग ने हाथ पीछे खींच लिए हैं। इनमें ट्रिब्यूनल के 64 और हाईकोर्ट के 13 मामले शामिल हैं। यह वाद कुल करीब 250 करोड़ रुपये की टैक्स दावेदारी के थे।

प्रदेश में बढ़े एक लाख नए करदाता

उन्होंने बताया कि अब ट्रिब्यूनल से यदि किसी 20 लाख रुपये से कम, हाईकोर्ट से 50 लाख रुपये से कम और सुप्रीम कोर्ट से एक करोड़ रुपये से कम टैक्स दावेदारी के मामले में आयकर विभाग हार जाता है तो उसकी आगे पैरवी नहीं की जाएगी।

संबंधित न्यायालय के आदेश को ही पूर्ण रूप से लागू कर दिया जाएगा। यह नियम न केवल भविष्य के वादों में लागू होगा बल्कि इसी नियम के तहत पुराने वादों को भी वापस लिया गया है।

प्रदेश में आयकर जमा कराने वाले एक लाख नए करदाता सामने आए हैं। इसके साथ ही इस साल अभी तक आयकर विभाग ने टैक्स वसूली के नए रिकॉर्ड बनाए हैं। दूसरी ओर, ओएनजीसी (ऑयल नेचुरल गैस कमीशन) ने गत वर्ष दो हजार करोड़ के मुकाबले इस वर्ष अभी तक चार हजार करोड़ रुपये एडवांस टैक्स जमा कराया है।
 
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सर्वेक्षण से पकड़ा 30 करोड़ का काला धन

मुख्य आयकर आयुुक्त रजनी कांत गुप्ता ने बताया कि गत वर्ष प्रदेश मेें 10,840 करोड़ रुपये की टैक्स वसूली हुई थी। इस साल टारगेट 12,179 करोड़ रुपये का रखा गया है। इस वित्तीय वर्ष में अप्रैल से अभी तक टैक्स वसूली में 44.46 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि ओएनजीसी से इस साल अभी तक दो तिमाही में 4,900 करोड़ रुपये टैक्स वसूल किया जा चुका है।

गत वर्ष दो तिमाही में ओएनजीसी ने 2050 करोड़ रुपये एडवांस टैक्स जमा कराया था। गत वर्ष ओएनजीसी से 9,739 करोड़ रुपये का टैक्स मिला था। प्रदेश में नए करदाताओं की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस साल 1,37,470 नए करदाता का लक्ष्य रखा गया था, जिनमें से अभी तक 1,08,089 नए करदाता सामने आ चुके हैं। वित्तीय वर्ष खत्म होने तक इनकी संख्या में और बढ़ोतरी हो सकती है। 31 मार्च 2018 तक प्रदेश में 7,68,213 करदाता थे, जिनकी संख्या बढ़कर अब 8,76,302 हो गई है।

आयकर विभाग ने इस वित्तीय वर्ष में अभी तक प्रदेश में 16 सर्वेक्षण किए हैं। इनसे अभी तक विभाग ने 30 करोड़ रुपये का काला धन पकड़ा है। मुख्य आयकर आयुुक्त ने बताया आयकर विभाग की ओर से सर्वेक्षण की कार्रवाई जारी है। इसमें राशि बढ़ सकती है।
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