कर्णप्रयाग में निहंगों के विवाद के मामले में पंजाब से आए सिखों के प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को डीजीपी दीपम सेठ से मुलाकात की। फरीदकोट के सांसद सरबीज सिंह खालसा और दाखा विधायक मनप्रीत सिंह अयाली के साथ पहुंचे थे सिख समुदाय के लोगों ने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
दूसरे पक्ष के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए। इसके साथ ही सिखों को बिना दस्तार के कोर्ट में पेश करने के जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ भी जांच की जाए। प्रतिनिधिमंडल में उत्तराखंड सिख संगठन के प्रधान सतविंदर सिंह भी मौजूद थे। डीजीपी से मुलाकात के बाद दाखा विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने बताया कि डीजीपी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि सारे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। अयाली ने बताया कि गत 16 जून को कर्णप्रयाग में हुई घटना और निहंग सिखों की गिरफ्तारी के बाद पूरे सिख समुदाय में रोष व्याप्त है। उन्होंने अपने बचाव में हथियार चलाए थे। बावजूद इसे बिना किसी मेडिकल जांच के केवल बयानों के आधार पर सिखों पर हत्या के प्रयास में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई। जबकि, हमला उन पर पहले हुआ था। ऐसे में दूसरे पक्ष के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए।
इसके अलावा सबसे बड़ी चूक पुलिस प्रशासन ने सिखों को कोर्ट में पेश करने में की है। सिख समुदाय के युवकों को बिना दस्तार के नंगे सिर कोर्ट में पेश किया गया। यह सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंची है। ऐसे में उन्होंने डीजीपी से मांग की है कि इसके जिम्मेदार पुलिस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
सांसद सरबजीत सिंह खालसा ने कहा कि अभी तक की वार्ता सकारात्मक रही है। उम्मीद है कि डीजीपी उनकी मांगों पर विचार कर सही कार्रवाई करेंगे। यदि ऐसा नहीं हुआ तो चाहे उन्हें लगातार देहरादून क्यों न आना पड़े हम न्याय के लिए यहां आते रहेंगे।