जो लोग घर बनाने के बारे में सोच रहे वह पहले यह खबर जरूर पढ़ लें। जानिए क्या है मामला...
भवन बनना अब लोगों के लिए और भी महंगा साबित होगा। वन विभाग ने मंगलवार से खनिज सामग्री पर साढ़े तीन रुपये प्रति क्विंटल ट्रांजिट शुल्क बढ़ा दिया है, इसका असर खनिज सामग्री के दामों पर पड़ना तय है।
इधर खनन कारोबारियों ने ट्रांजिट शुल्क बढ़ने पर दाम बढ़ोतरी पर विचार शुरू कर दिया है। दाम बढ़ने पर अब रेता नदी से कांटे तक 68.50 रुपये प्रति क्विंटल होगा। लोहाघाट की बात की जाए तो यहां फुटकर में टनकपुर का रेता 150 रुपये क्विंटल की दर से बिक रहा है।
उत्तराखंड के साथ ही उत्तर प्रदेश में भी मांग
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शारदा खनन से रेता, बजरी और पत्थर की उत्तराखंड के साथ ही उत्तर प्रदेश में भी खासी मांग है। यहां की खनिज सामग्री का बड़ा हिस्सा चंपावत जिले के मैदानी क्षेत्र के साथ ऊधम सिंह नगर जिले में होता है।
वैसे तो शासन ने गत वर्ष ही ट्रांजिट शुल्क की दर साढ़े तीन रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा दी थी, लेकिन तब खनन कारोबारियों के उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश लाने पर शुल्क बढ़ोतरी लागू नहीं थी, लेकिन अब विभाग ने मंगलवार से ट्रांजिट शुल्क डेढ़ रुपये से बढ़ाकर पांच रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है।
खनिज सामग्री पर साढ़े तीन रुपये ट्रांजिट शुल्क की बढ़ोतरी
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यानी कि प्रति क्विंटल खनिज सामग्री पर साढ़े तीन रुपये ट्रांजिट शुल्क की बढ़ोतरी हुई है। खनन प्रभारी हरीश पाल ने बताया कि उच्च न्यायालय द्वारा गत वर्ष दिया गया स्थगन आदेश बीते खनन सीजन के लिए ही था।
इधर, ट्रांजिट शुल्क बढ़ने पर खनन कारोबारी भी खनिज सामग्री का दाम बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। शक्तिमान ट्रक एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेंद्र सिंह ज्याल योगी का कहना है कि ट्रांजिट शुल्क में हुई बढ़ोतरी के सापेक्ष खनिज सामग्री के दाम भी साढ़े तीन रुपये बढ़ाए जाएंगे।
नदी से आरबीएम और पत्थरों के दाम 55 रुपये प्रति क्विंटल थे, जो अब बढ़कर 58.50 रुपये प्रति क्विंटल हो गए हैं। वहीं रेत की निकासी 65 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 68.50 रुपये प्रति क्विंटल होगी।