आईएमए स्थित आर्मी कैडेट कॉलेज (एसीसी) से ग्रेजुएट होकर अकादमी की मुख्यधारा में शामिल हुए कैडेट्स में ऊधमसिंह नगर के काशीपुर निवासी धीरज गुणवंत ने गोल्ड मेडल समेत तीन मेडल अपने नाम किए। उन्होंने चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ गोल्ड मेडल के साथ ही साइंस व सर्विस सब्जेक्ट में कमांडेंट सिल्वर मेडल जीता।
उन्होंने बताया कि उनके पिता देवेंद्र गुणवंत का काशीपुर में जनरल स्टोर है, मां आनंदी देवी गृहणी हैं, जबकि बड़ा भाई प्रवीण इंजीनियर है। वह अपने परिवार के पहले शख्स हैं, जो सेना में अधिकारी बनेंगे।
धीरज ने बताया कि उनकी शुरुआती पढ़ाई ताड़ीखेत अल्मोड़ा स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में हुई है। बचपन से ही उन्होंने सेना में जाने का सपना देखा था। वर्ष 2010 में वह बतौर एयरमैन भर्ती हुए। अब मेहनत की दम पर अगले साल सेना में अफसर बनेंगे।
असफलता के बाद भी नहीं मानी हार, अब बनेंगे अफसर
चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ सिल्वर मेडल पाने वाले उत्तर प्रदेश रायबरेली निवासी राहुल वर्मा की कहानी भी दिलचस्प है। वह बताते हैं कि उन्होंने तीन बार एनडीए की परीक्षा दी, लेकिन हर बार उन्हें असफलता मिली। वहीं, टेक्निकल एंट्री स्कीम के जरिये भी किया गया प्रयास सफल नहीं रहा। वर्ष 2013 में एयरफोर्स में भर्ती होने के बाद अब वह सेना में अफसर बनेंगे। राहुल के पिता रामकेशव वर्मा एयरफोर्स में जूनियर वारंट अफसर हैं।
संदीप ने परंपरा को आगे बढ़ाया
ब्रांज मेडल पाने वाले राजस्थान के जयपुर निवासी संदीप सिंह शेखावत ने परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाया है। उनके पिता धर्मपाल सिंह सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हैं। वहीं, दादा नत्थू सिंह फौज में हवलदार तथा परदादा शैतान सिंह दूसरे विश्व युद्ध में शहीद हुए थे। संदीप के छोटे भाई अजय अंतरराष्ट्रीय वेट लिफ्टर हैं। संदीप चौथी पीढ़ी हैं, जो सेना में हैं।