पता चला कि मल्टी ऑर्गन फेल्योर हो गया है। 19 दिन तक जीसी राजशेखर आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच जूझते रहे। परिजन उनकी कुशलता की प्रार्थना करते रहे जबकि उनकी बटालियन के अधिकारी उनका हौसला बढ़ाते रहे।
आखिरकार 19 दिन की जंग में राजशेखर की जीत हुई। इसके बाद उन्होंने मेहनत की और इस साल पासिंग आउट परेड में सबके साथ कदमताल किया। आईएमए से पासआउट होने का उनका सपना पूरा हो गया।
जीसी राजशेखर अभी मेडिकल ट्रीटमेंट पर हैं, लेकिन उनका कहना है कि आगे बढ़ने और हालात से लड़ने के लिए शारीरिक नहीं मानसिक स्वस्थता जरूरी है। वह अपने परिवार के पहले फौजी अफसर हैं। आईएमए से बेस्ट मोटिवेशनल कैडेट का अवार्ड पाकर बेहद उत्साहित नजर आए।
कठिन है ट्रेनिंग
आईएमए का प्रशिक्षण बेहद कठिन है। गत वर्ष यहां प्रशिक्षण के दौरान एक कैडेट की मौत हो गई थी। ऐसे ही हालातों से लड़ने वाले कैडेट राजशेखर का कहना है कि आईएमए का प्रशिक्षण वाकई कठिन है, लेकिन प्रशिक्षण के दौरान आईएमए के अधिकारी आपका हौसला भी बढ़ाते हैं। उन्होंने सेना में भर्ती होने जा रहे युवाओं को संदेश दिया कि वह शारीरिक के साथ ही मानसिक मजबूती के साथ सेना में भर्ती हों।