राजधानी देहरादून में विभिन्न मोबाइल कंपनियों के अवैध रूप से लगाए जा रहे टावरों की बाढ़ आई हुई है। शहरी क्षेत्र में 163 और ग्रामीण क्षेत्र में 18 मोबाइल टावर अवैध हैं।
आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में यह खुलासा हुआ है।अधिवक्ता सुयश कुकरेती ने शासन से प्रदेश में अवैध और वैध मोबाइल टावरों की जानकारी मांगी थी। इसमें कुल स्थापित मोबाइल टावरों के साथ ही विभिन्न सात बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई थी, लेकिन प्रदेश भर के टावरों की जानकारी मांगे जाने के बावजूद केवल दून और हरिद्वार जनपद के टावरों की जानकारी दी गई।
प्राधिकरण ने स्वीकृति दी
इसके अनुसार दून में एमडीडीए से स्वीकृत टावरों की संख्या 38 है, जबकि मानकों की अनदेखी कर लगाए गए टावर 163 हैं। वही दूनघाटी विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के सहायक अभियंता सर्वेश मित्तल ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में 25 मोबाइल टावर स्थापित हैं।
इसमें कुल सात मोबाइल टावरों को प्राधिकरण ने स्वीकृति दी है, जबकि 18 मोबाइल टावर अवैध रूप से स्थापित हैं। सहायक अभियंता ने बताया कि प्राधिकरण ने इसमें छह अवैध टावरों के ध्वस्तीकरण के आदेश दिए हैं।
बोर्ड से केवल 12 ने ली है एनओसी
मोबाइल टावर के लिए उत्तराखंड पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से दून में केवल 12 मोबाइल टावरों के लिए एनओसी ली गई है, जबकि अन्य बोर्ड की बगैर एनओसी लिए जहां तहां स्थापित किए गए हैं।
स्वास्थ्य के लिए है खतरनाक
चिकित्सकों की मानें तो टावरों से निकलने वाली तरंगें स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं, इससे कैंसर होने का खतरा बना रहता है। इससे नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है और शरीर में गांठें होने लगती हैं।