राजधानी देहरादून में गैस रीफिलिंग का अवैध कारोबार धड़ल्ले से जारी है। चोरखाला, गांधीग्राम, रिस्पना पुल, ब्रह्मपुरी समेत शहर के कई इलाकों में ये धंधा फूल-फल रहा है, लेकिन विभाग के कर्मचारी कभी भी इनके खिलाफ कोई कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाते हैं।
विभाग की इस हीलाहवाली के कारण तेल कंपनियों की छोटे सिलेंडर देने की योजना भी सफल नहीं हो पा रही है। इतना ही नहीं विभाग कभी सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं के यहां भी छापेमारी भी नहीं करता।
जिलापूर्ति कार्यालय के पास राशन कार्ड बनाने के अलावा सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं के दुकानों के निरीक्षण, अवैध गैस रीफिलिंग के कारोबार पर पाबंदी लगाना, होटलों और अन्य बड़े संस्थानों में चेकिंग करना कि घरेलू सिलेंडर इस्तेमाल तो नहीं हो रहा आदि की जिम्मेदारी भी है। लेकिन, विभाग राशन कार्ड बनाने के अलावा अन्य कार्यों पर विशेष ध्यान नहीं दे रहा है।
इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विभाग की टीम पिछले एक साल में निरीक्षण के लिए सिर्फ दो-तीन बार ही बाहर निकली है। इससे उलट पुलिस ने दर्जनों बार गैस रीफिलिंग के अवैध कारोबार का भंडाफोड़ किया है। वहीं, जिला पूर्ति अधिकारी अवैध गैस रीफिलिंग के इस धंधे के लिए गैस एजेंसियों को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि एजेंसियां दलालों को सिलेंडर देना बंद कर दें तो इस धंधे पर अपने आप ही लगाम लग जाएगा।
हादसे का बड़ा खतरा
तेल कंपनियों की मानें तो छोटे सिलेंडर की रीफिलिंग के दौरान हादसे का बड़ा खतरा रहता है। इतना ही नहीं दुकानदार मनमर्जी तरीके से ग्राहकों से पैसा वसूलता हैं। बाजार में बिकने वाले छोटे सिलेंडर भी मानक के अनुरूप नहीं होते हैं, ऐसे में हादसे का खतरा और बढ़ जाता है।
नहीं मिल रहे कंपनियों के छोटे सिलेंडर
तेल कंपनियों ने छोटे सिलेंडर बाजार में उतारने की योजना चलाई तो, लेकिन हकीकत में पर्याप्त मात्रा में सिलेंडर बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। इस कारण लोग अवैध कारोबारियों से छोटे सिलेंडर खरीद लेते हैं। इस समय दून में भारत पेट्रोलियम के छोटे सिलेंडर मात्र एक दो स्थानों पर उपलब्ध हैं। आईओसी के एरिया मैनेजर एसके सिन्हा ने कहा कि छात्रों और जरूरतमंद लोगों के लिए ही तेल कंपनियां इस व्यवस्था को शुरू कर रही हैं। गैस की अवैध तरीके से हो रही रीफिलिंग पर यदि सही तरीके से पाबंदी लग जाए तो यह व्यवस्था सफल हो जाएगी।
शिकायत के आधार पर टीम तत्काल मौके पर जाकर निरीक्षण कर कार्रवाई करती है। शहर में ज्यादातर लोगों के पास गैस कनेक्शन है। एजेंसी वाले जब दलालों को सिलेंडर देंगे ही नहीं तो अवैध गैस रीफिलिंग अपने आप ही खत्म हो जाएगी।
-पीएस पांगती, जिलापूर्ति अधिकारी