देहरादून में हुए नकरौंदा हत्याकांड में पुलिस की विफलता पूरे महकमे के लिए नासूर बन गई है।
सीएम ने दी दो टूक हिदायत
सीएम हरीश रावत के कड़े रुख के बाद राजधानी और शहर के दूसरे हिस्सों में अब कोई अवैध बस्ती बसी या नया निर्माण हुआ तो संबंधित थाना प्रभारी की खैर नहीं होगी। मंगलवार को नकरौंदा हत्याकांड की समीक्षा के दौरान थाना प्रभारियों को यह दो टूक हिदायत दे दी गई।
अब तक राजनीतिक नफे-नुकसान के लिहाज से शासन या प्रशासन ने राजधानी में अवैध बस्तियों पर कभी तल्खी नहीं दिखाई थी। यह पहला मौका है, जब शासन ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए कड़ा रुख अपनाया है।
मुख्यमंत्री की ओर से नकरौंदा में सहायक कृषि अधिकारी सुरेंद्र थपलियाल के घर डकैती और बेटे अंकित थपलियाल की हत्या में हुई कार्रवाई की समीक्षा मीटिंग में अवैध बस्तियों का मुद्दा उठा। पुलिस अफसरों का कहना था कि बस्ती में संदिग्धों की घुसपैठ लगातार बढ़ रही है।
सीएम ने अवैध बस्तियों पर कड़ी नाराजगी जताते हुए थाना प्रभारियों की जिम्मेदारी तय कर दी। एसएसपी अजय रौतेला ने मंगलवार को थाना प्रभारियों से सीएम की मंशा जाहिर कर दी। कहा गया है कि थाना प्रभारी इलाके में घूमकर बस्तियों का पूरा डाटा बनाएं। सुनिश्चित करें कि भविष्य में न अवैध बस्ती बस पाए और ना बस्तियों में आगे निर्माण हो।
सियासतदानों पर कौन कसेगा लगाम
राजधानी में नदियों किनारे बस्तियां बसाने में राजनीतिज्ञों की अहम भूमिका रही है। पहले उन्हें जगह दी गई, फिर धीरे-धीरे पक्के निर्माण करा दिए। नेताओं के संरक्षण के चलते अधिकारी भी जिम्मेदारी से बचते रहे। लगाम के लिए सरकार को संयुक्त फार्मूला लाना होगा, ताकि विभागों की जिम्मेदारी तय की जा सके।
मुख्यमंत्री ने अवैध बस्तियों और सरकारी जमीन पर कब्जे पर कड़ी नाराजगी जताई है। थाना प्रभारियों को अपने-अपने इलाकों में सजग रहने को कहा गया है। फिर भी ऐसा होता है तो संबंधित थाना प्रभारियों को दंडित किया जाएगा।
- बीएस सिद्धू, डीजीपी