परिवहन निगम नियमों को दरकिनार कर निजी बस संचालक आईएसबीटी के पास से ही दो दर्जन से अधिक एसी, नॉन एसी बसों का संचालन कर रहे हैं। अन बसों का संचालन कर रही कंपनियां आनलाइन बुकिंग कर यात्रियों को आईएसबीटी के सामने से बैठा रही हैं।
यूपी, राजस्थान व गुजरात के कई ऐसे टूर आपरेटर्स हैं जो बिना किसी अनुमति के ही आईएसबीटी के पास से ही वातानुकूलित, सुपर डीलक्स बसें संचालित कर रहे हैं। बस संचालक आनलाइन बुकिंग कर आईएसबीटी के ठीक पास से सवारियां लेकर दिल्ली, कानपुर, जयपुर, चंडीगढ़, इंदौर, आगरा, जोधपुर की यात्रा करा रहे हैं। बसों के इस अवैध संचालन से परिवहन निगम को प्रतिदिन लाखों की चपत लग रही है। वहीं सूत्रों का कहना है कि विभागीय अफसरों की मिलीभगत से इन बसों का संचालन हो रहा है।
क्या कहता है मोटर व्हीकल एक्ट
मोटर व्हीकल एक्ट के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों पर बसों के संचालन का पहला अधिकार राज्य के परिवहन निगम की बसों को है। उसके बाद परिवहन विभाग की अनुमति व संबंधित परिवहन निगम के अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने के बाद निजी बसों के संचालन को अनुमति दी जा सकती है। निगम से अनापत्ति के लिए बस संचालकों को एकमुश्त भुगतान करना होगा। साथ ही बस अड्डों के 500 मीटर की परिधि में किसी भी निजी वाहन को बतौर सार्वजनिक वाहन संचालन की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
निगम के बस अड्डों के पास से निजी बसों का संचालन रोकने के लिए सभी सहायक महाप्रबंधकों को पत्र लिखा गया है। इस संबंध में जल्द ही परिवहन विभाग के अफसराें के साथ बैठक कर आगे की रणनीति बनाई जाएगी। बसों के अवैध संचालन पर अंकुश लगाया जाएगा।
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दीपक जैन, महाप्रबंधक, परिवहन निगम
निजी बसों के संचालन की जानकारी नहीं है। यदि ऐसा हो रहा है तो गलत है। परिवहन निगम व विभाग की संयुक्त टीम गठित कर जल्द अभियान चलाया जाएगा। इस संबंध में विभागीय प्रवर्तन टीम को कार्रवाई के लिए निर्देश जारी किए जाएंगे।
- डीसी पठोई, आरटीओ