एक तरफ आमजन मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान हैं तो दूसरी ओर राज्य के नौकरशाहों ने अपनी सुविधा के लिए करोड़ों रुपए ठिकाने लगा दिए। आमजन से जुड़ी योजनाओं के लिए बजट का रोना रोने वाले नौकरशाहों ने इतनी सफाई से काम किया कि सिस्टम तक को खबर हुई।
नगर निगम की जमीन पर बहने वाले नालों पर बने इन पुलों की शिकायत जब निगम को मिली तो मेयर विनोद चमोली ने भूमि अनुभाग को गुप्त जांच करने के आदेश दिए। एक हफ्ते में अनुभाग ने मेयर को जो जांच रिपोर्ट सौंपी वह चौंकाने वाली थी। चीड़ोवाली में जो पुल बना है, वह एक वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारी के भवन तक पहुंचने के लिए बनवाया गया है। जिस विभाग से बनवाया गया, वह वरिष्ठ अधिकारी उसी विभाग में तैनात है।
इसी तरह मसूरी डायवर्जन पर रिजर्व फारेस्ट के अंदर बने दूसरे पुल का निर्माण एक अन्य विभाग ने करवाया है। दरअसल, वहां एक बिल्डर ने प्लाटिंग की है। उस प्लाटिंग में कई वरिष्ठ अधिकारियों के प्लाट हैं। सूत्रों के अनुसार, जंगल के बीचों-बीच भवन तक पहुंचने में कई बाधाएं थीं, लेकिन बिल्डर ने जमीन इसलिए सस्ते रेट में दी कि पुल खुद खरीदार बनवा देंगे।
कंडौली मार्ग पर चीड़ोवाली क्षेत्र में नगर निगम का नाला है। यहां पर एक कच्चा रास्ता है, जो जंगल के बीच से गुजरता है। थोड़ा आगे चलने पर यहां करोड़ों की लागत से बनाया गया एक पुल मिलता है, लेकिन किसी भी विभाग को यह नहीं मालूम कि ये पुल आखिर किसने और कब बनवाया।
मसूरी डायवर्जन से कुछ आगे पेट्रोल पंप के बगल से एक कच्चा रास्ता रिजर्व फारेस्ट की तरफ जाता है। तकरीबन दो किलोमीटर अंदर जाने पर एक बड़ा पक्का पुल दिखता है। किसी भी विभाग से यह पुल स्वीकृत नहीं है और न ही यह रास्ता किसी रिहायसी इलाके की तरफ जाता है।
पहले तो बिना निगम की एनओसी के पुल बनाए, दूसरा बिना स्वीकृति के बनाए गए और तीसरा जहां न सड़क है न रिहायशी इलाका, वहां के लिए करोड़ों रुपये का पुल बनाना समझ से परे है। जांच में पता चला कि दोनों ही इलाकों में शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के प्लाट हैं। सारा खेल इसीलिए किया गया है। निगम अपने स्तर से कार्रवाई करेगा और सरकार के समक्ष भी इस मुद्दे को उठाया जाएगा।
- विनोद चमोली, मेयर