केंद्रीय जलसंसाधन और गंगा सफाई अभियान मंत्री के तौर पर उमा भारती की भूमिका बदल गई है। लोगों को उम्मीद है कि गंगा की शुचिता पर जोर देने वाली उमा खुद ऐसे काम करेंगी जो नजीर बनेगी।
आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिक भी इस बाबत उमा से ढेरों उम्मीद लगाए बैठे हैं। इस उम्मीद की वजह भी है।
पांच महीने पहले उमा भारती जब रुड़की आई थीं तो उन्होंने आईआईटी वैज्ञानिकों द्वारा खोजी गई ‘प्यानो की वे’ तकनीकी की गहन जानकारी ली थी।
इस तकनीकी के जरिए बिना बांध बनाए गंगा से बिजली का उत्पादन किया जा सकता है। इस तकनीकी को उन्होंने काफी सराहा था।
अखबार में खबर ने खींचा उमा का ध्यान
दरअसल उमा भारती की प्यानो की वे तकनीकी में दिलचस्पी अमर उजाला के 27 अप्रैल 2012 के अंक में छपी ‘बिजली भी बनेगी, धारा भी बहती रहेगी’ शीर्षक प्रकाशित खबर को पढ़कर जगी थी।
31 जनवरी 2013 को उमा आईआईटी रुड़की पहुंची थीं। तब अमर उजाला से बातचीत में उमा ने बताया था कि उन्होंने आईआईटी के जल संसाधन विकास एवं प्रबंधन विभाग में वैज्ञानिक प्रो. नयन शर्मा से ‘प्यानो की वे’ तकनीक के बारे में जानकारी ली है।
तकनीकी की जानकारी पाकर उन्होंने माना था कि इससे गंगा की कई समस्याओं का समाधान निकल सकता है। उन्होंने कहा था कि भाजपा के ‘समग्र गंगा’ अभियान में यह तकनीक अविरल धारा का आधार बनेगी।
वैज्ञानिकों ने उमा को दिया था प्रजेंटेशन
उन्होंने यह भी बताया था कि उत्तराखंड में इस समय छह हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जबकि ‘प्यानो की वे’ तकनीक से 60 हजार मेगावाट बिजली बिना गंगा की धारा को अवरुद्ध किए पैदा की जा सकती है।
उमा के समक्ष प्रो. नयन शर्मा ने तकनीकी का प्रजेंटेशन भी दिया था। अब जबकि यह मंत्रालय उमा को मिल गया है तो वैज्ञानिकों की उम्मीद बढ़ गई है।
उमा भारती गंगा अभियान को लेकर काफी गंभीर थीं। हमें उम्मीद है कि निश्चित ही उमा भारती को मंत्रालय मिलने से गंगा में आईआईटी की तकनीकी का इस्तेमाल हो सकेगा।
-प्रो. कमल जैन एवं तकनीक विशेषज्ञ प्रो. नयन शर्मा
वैज्ञानिक आईआईटी रुड़की