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IIT रुड़कीः निष्कासित छात्रों के समर्थन में सीनियर्स

Fri, 24 Jul 2015 01:11 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, नैनीताल
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आईआईटी से निकाले गए छात्रों के विरोध में अप्रत्याशित कदम उठाते हुए संस्थान के सीनियर छात्र कक्षाओं का बहिष्कार कर धरने पर बैठ गए।
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गुरुवार को अचानक सीनियर छात्रों के इस प्रकार कदम उठाए जाने का शायद आईआईटी के अधिकारियों को अहसास भी नहीं रहा होगा। आनन-फानन में धरनास्थल पर पहुंचे अधिकारियों ने सीनियर छात्रों को अनुशासनात्मक कार्रवाई का डर सहित सभी तरीकों से उन्हें समझाने की कोशिश की।

लेकिन, छात्र नहीं माने और फिर परिसर में ‘टेक दैम बैक’ के नारे लगाते हुए रैली निकाली। अधिकारियों की ओर से कोई सकारात्मक रुख नहीं मिलने के बाद करीब दो बजे छात्र धरना से उठ गए। छात्रों का कहना था कि आगे के आंदोलन के लिए रणनीति बनाई जा रही है।
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आईआईटी ने कम सीजीपीए के चलते 72 छात्रों को संस्थान से बाहर निकाल दिया है। इन छात्रों की मर्सी अपील पर आईआईटी की सीनेट और एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में इन छात्रों को कोई राहत नहीं दी गई। 22 जुलाई को हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की सुनवाई के दौरान आईआईटी के पक्ष में ही फैसला सुनाया और केवल दो छात्रों को राहत प्रदान की।

फैसले के अगले दिन गुरुवार को बाहर निकाले गए प्रथम वर्ष के छात्रों के साथ द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ वर्ष के छात्र भी लामबंद हो गए और उन्हें वापस लिए जाने की मांग करते हुए कक्षाओं का बहिष्कार कर दिया। यह छात्र सुबह आठ बजे लेक्चर हॉल कांप्लेक्स से बाहर निकल धरने पर बैठ गए।

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सुरक्षाकर्मियों ने घसीटकर निकाला बाहर

करीब एक घंटे बाद डीन स्टूडेंट प्रो. डीके नौडियाल और डॉ. एके नवानी छात्रों को समझाने आए और कहा कि कक्षाओं का बहिष्कार कोई समाधान नहीं हो सकता। यह नियमानुसार लिया गया फैसला था। फिर यदि छात्रों को कोई आपत्ति है तो वह मर्सी अपील दे सकते हैं।

जिस पर संस्थान के अधिकारी विचार करेंगे। लेकिन, छात्र नहीं माने और दोपहर करीब 12 बजे ‘टेक दैम बैक के स्लोगन वाला बैनर लेकर नारेबाजी करते हुए परिसर में विशाल जुलूस निकाला। जुलूस लेक्चर हॉल पर आकर समाप्त हुआ। यहां छात्र थोड़ी देर धरने पर बैठकर उठ गए। छात्रों का कहना था कि आंदोलन को जारी रखने के लिए रात को रणनीति तय की जाएगी।

आईआईटी प्रबंधन ने छात्रों को आंदोलन को तोड़ने के लिए सभी तरह के हथकंडे अपनाने की कोशिश की। धरने पर बैठे के एक निष्कासित छात्र अभिषेक को सुरक्षाकर्मियों ने यह कहते हुए पकड़ लिया कि वह संस्थान का छात्र नहीं है। इसलिए परिसर में उसे किसी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के अधिकार नहीं है।

इतना ही नहीं सुरक्षाकर्मी उसे घसीटते हुए बाहर ले आए। इस दौरान अन्य छात्र अनुशासन के डर से इस घटना का विरोध करने के लिए सामने नहीं आए, लेकिन धरने स्थल पर मुस्तैदी के साथ डटे रहे।
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