आईआईटी से निकाले गए छात्रों के विरोध में अप्रत्याशित कदम उठाते हुए संस्थान के सीनियर छात्र कक्षाओं का बहिष्कार कर धरने पर बैठ गए।
गुरुवार को अचानक सीनियर छात्रों के इस प्रकार कदम उठाए जाने का शायद आईआईटी के अधिकारियों को अहसास भी नहीं रहा होगा। आनन-फानन में धरनास्थल पर पहुंचे अधिकारियों ने सीनियर छात्रों को अनुशासनात्मक कार्रवाई का डर सहित सभी तरीकों से उन्हें समझाने की कोशिश की।
लेकिन, छात्र नहीं माने और फिर परिसर में ‘टेक दैम बैक’ के नारे लगाते हुए रैली निकाली। अधिकारियों की ओर से कोई सकारात्मक रुख नहीं मिलने के बाद करीब दो बजे छात्र धरना से उठ गए। छात्रों का कहना था कि आगे के आंदोलन के लिए रणनीति बनाई जा रही है।
आईआईटी ने कम सीजीपीए के चलते 72 छात्रों को संस्थान से बाहर निकाल दिया है। इन छात्रों की मर्सी अपील पर आईआईटी की सीनेट और एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में इन छात्रों को कोई राहत नहीं दी गई। 22 जुलाई को हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की सुनवाई के दौरान आईआईटी के पक्ष में ही फैसला सुनाया और केवल दो छात्रों को राहत प्रदान की।
फैसले के अगले दिन गुरुवार को बाहर निकाले गए प्रथम वर्ष के छात्रों के साथ द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ वर्ष के छात्र भी लामबंद हो गए और उन्हें वापस लिए जाने की मांग करते हुए कक्षाओं का बहिष्कार कर दिया। यह छात्र सुबह आठ बजे लेक्चर हॉल कांप्लेक्स से बाहर निकल धरने पर बैठ गए।