वासुकी इंडिकस कैसे रहते थे
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह एक गुप्त शिकारी था। आज जो एनाकोंडा देखते हैं, उसी तरह वासुकी इंडिकस भी संभवतः धीरे-धीरे चलता था और अपने शिकार पर हमला करने के लिए सही समय का इंतजार करता था। इसके बड़े आकार ने इसे इसके प्राचीन पारिस्थितिकी तंत्र में एक दुर्जेय शिकारी बना दिया होगा।
भगवान शिव के गले में रहता है वासुकी
वासुकी इंडिकस अद्वितीय है और इसका नाम वासुकी के नाम पर रखा गया है। इसे अक्सर भगवान शिव के गले में चित्रित किया जाता है। यह नाम न केवल इसकी भारतीय जड़ों को दर्शाता है बल्कि इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी संकेत देता है। वासुकी इंडिकस की खोज इओसीन काल के दौरान सांपों की जैव विविधता और विकास पर नई रोशनी डालती है। यह मैडत्सोइडे परिवार के भौगोलिक प्रसार के बारे में भी जानकारी प्रदान करता है, जो अफ्रीका, यूरोप और भारत में लगभग 100 मिलियन वर्षों से मौजूद था।
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यह खोज न केवल भारत के प्राचीन पारिस्थितिकी तंत्र को समझने के लिए बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप पर सांपों के विकासवादी इतिहास को जानने के लिए भी महत्वपूर्ण है। आईआईटी रूड़की के निदेशक प्रो. केके पंत ने कहा, हमें प्रो. सुनील बाजपेयी और उनकी टीम पर बेहद गर्व है। वासुकी इंडिकस का खुलासा आईआईटी रूड़की की अभूतपूर्व जीवाश्म खोजों की बढ़ती सूची में और इजाफा करता है। - सुनील बाजपेयी, प्रोफेसर भू विज्ञान विभाग, आईआईटी, रुड़की