देश में किए गए प्रयोगों के तहत चेतावनी संदेशों को मोबाइल नंबरों के लिए, छह बार 20 एसएमएस के एक सेट में प्रेषित किया गया। इसमें पाया गया कि 58 मैसेज 10 सेकंड के भीतर दिए गए। इसके 40 सेकेंड के बाद नई जानकारी प्रेषित की गई। वहीं, इटली में किए गए अध्ययन के दौरान 15 चेतावनी एसएमएस दस बार प्रसारित किए गए। इस दौरान पाया गया कि 102 मैसेज को 10 सेकंड के भीतर वितरित किया गया। अधिकतम 50 सेकंड की अवधि के बाद अन्य जानकारियां प्रेषित की गईं।
बारिश की ताजा जानकारी के आधार पर जारी करता है एसएमएस
किसी भी पहाड़ी क्षेत्र के लिए जियो वार्न सिस्टम कई घटकों के आधार पर संचालित होता है। डॉ. जयंत कुमार ने बताया कि इसके लिए संबंधित जगह पत्थर और मिट्टी की प्रकृति के अलावा पहाड़ के ढलान का आंकड़ा फीड किया जाता है। इसके बाद सेटेलाइट के जरिये बारिश की ताजा स्थिति के अनुसार, एसएमएस के जरिये मोबाइल पर चेतावनी जारी की जाती है।
सिस्टम की खासियत यह है कि इससे मौसम के पूर्वानुमान की तरह चेतावनी जारी नहीं होती बल्कि वर्तमान स्थिति के अनुसार मोबाइल कनेक्टिविटी के जरिये अपडेट जारी होता है। वैज्ञानिक के अनुसार, रियल टाइम के आसपास चेतावनी जारी होने से पहाड़ों की यात्रा कर रहे लोगों को जोखिम की जानकारी मिल जाती है।
2012 में मिल चुका है बेस्ट थीसिस का अवार्ड
इस तरह के जियो स्पेशियल डाटा के उपयोग, विश्लेषण के लिए ऑटोमेशन और डिसीजन सपोर्ट सिस्टम विकसित करने के लिए डॉ. जयंत घोष को हाल ही में इंडियन सोसायटी फॉर रिमोट सेंसिंग (आईएसआरएस) की ओर से लाइफ टाइम अचीवमेंट के लिए नेशनल जीयो स्पेशियल अवार्ड दिया गया है। इसके अलावा 2012 में इंडियन नेशनल एकेडमिक इंजीनियरिंग (आईएनएई) सोसायटी की ओर से बेस्ट थीसिस अवार्ड और आईआईएम अहमदाबाद ने 2013 में बेस्ट इनोवेशन थिसिस अवार्ड प्रदान किया है।