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अमर उजाला एक्सक्लूसिव : आईएएफएस संजीव को उत्तराखंड की ओर से दी गई एनओसी से छेड़छाड़ पर रोक

Tue, 20 Oct 2020 10:03 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • केट इलाहाबाद ने जारी किया आदेश, अब वापस नहीं हो पाएगी एनओसी
  • लोकपाल दिल्ली की अनवेषण शाखा में प्रतिनियुक्ति को मिली थी संजीव को प्रदेश से एनओसी
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संजीव चतुर्वेदी - फोटो : File Photo
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विस्तार
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भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग के लिए जाने जाते भारतीय वन सेवा के 2002 उत्तराखंड बैच के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को उत्तराखंड सरकार की ओर से दी गई एनओसी से छेड़छाड़ पर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (केट) की इलाहाबाद बेंच ने रोक लगा दी है। इसका मतलब यह भी हुआ कि संजीव की एनओसी को राज्य सरकार वापस नहीं ले सकती। केट ने कहा है कि मामले का निपटारा न होने तक इस एनओसी को जस का तस रखा जाए।

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संजुवी चतुर्वेदी ने करीब दस माह पहले दिल्ली लोकपाल की अनवेषण शाखा में अधिकारी के रूप में प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन किया था। संजीव का कहना था कि एम्स दिल्ली में मुख्य सर्तकता अधिकारी रहते हुए कई भ्रष्टाचार के मामलों को खोला था, लिहाजा में वे इस पद के लिए योग्य आवेदक हैं। संजीव को इसके लिए प्रदेश सरकार की एनओसी की जरूरत थी। संजीव इस समय हल्द्वानी वन अनुसंधान केंद्र में मुख्य वन संरक्षक के रूप में तैनात हैं। 

प्रदेश सरकार ने उनको एनओसी दे भी दी लेकिन केंद्र की ओर से इस पर कोई फैसला नहीं हुआ। पहले के अनुभव के आधार पर संजीव को आशंका थी कि केंद्र सरकार एनओसी को वापस लेने के लिए भी प्रदेश सरकार पर दबाव बना सकती है। इसी को देखते हुए संजीव ने केट में याचिका दाखिल की थी। केट ने इस मामले में राज्य सरकार के साथ ही केंद्र सरकार को भी पार्टी बनाया था।

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पहले भी दो बार हुआ है ऐसा

केंद्र सरकार का कहना था कि यह मामला प्रतिनियुक्ति से अलग है लिहाजा इस याचिका को खारिज किया जाए। ऑनलाइन सुनवाई करते हुए अब केट ने संजीव चतुर्वेदी को उत्तराखंड सरकार की ओर से दी गई एनओसी से छेड़छाड़ करने पर रोक लगा दी है। इसका मतलब यह भी हुआ कि संजीव की एनओसी को राज्य सरकार वापस नहीं ले सकती। केट ने कहा है कि मामले का निपटारा न होने तक इस एनओसी को जस का तस रखा जाए।

यह पहली बार नहीं है जब संजीव की एनओसी को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार के बीच मामला उलझा है। इससे पहले भी दो बार एनओसी को लेकर खींचतान हो चुुकी है। राज्य सरकार भी एनओसी जारी करने के बाद वापस ले चुकी है। इस बार राज्य सरकार ने तीन साल का कूलिंग समय पूरा होने और संजीव के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला न होने के आधार पर एनओसी जारी की है। 

संजीव ने वन अनुसंधान को भी दिलाई पहचान

संजीव के आने से पहले तक वन अनुसंधान संस्थान को पनिशमेंट पोस्टिंग के रूप में भी देखा जाता था, लेकिन तीन साल के कार्यकाल में वन अनुसंधान संस्थान कई मामलों में सुर्खियों में आया।
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