आईएफएस संजीव चतुर्वेदी ने उच्च न्यायालय उत्तराखंड के आदेश के बाद जुर्माने के रूप में केंद्र सरकार से मिले 25 हजार रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा करा दिए हैं। इसी के साथ प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में संजीव ने कहा है कि राहत कोष में पैसे जमा कराने के लिए धन के स्रोत को बताना जरूरी है और इसलिए वे स्पष्ट कर रहे हैं कि यह धनराशि उन्हें उच्च न्यायालय के उस आदेश के बाद मिली थी। जिसमें न्यायालय ने केंद्र सरकार को उनके (संजीव) प्रति रवैये को बदले की भावना करार दिया था। संजीव के मुताबिक, ‘यह उनकी समझ से बाहर है कि उनके खिलाफ वाद के रूप में खर्च किए गए लोक धन (पब्लिक मनी) की वसूली क्यों नहीं हुई और 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लोक धन से ही क्यों अदा किया गया।’
एम्स दिल्ली में मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) रहते हुए संजीव ने कई मामले उजागर किए थे। इसके बाद उन्हें इस पद से हटा दिया गया था, और उनकी 2015-16 की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज की गई थी। यही मामला बाद में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (केट) की नैनीताल बैंच के समक्ष पहुंचा था। बैंच के इस पर आदेश होने से ठीक पहले केट चेयरमैन ने स्थगन आदेश जारी किया और मामले को दिल्ली केट में हस्तांतरित करने का आदेश जारी किया था। केट चेयरमैन के इस आदेश को संजीव ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
इस पर न्यायालय ने चेयरमैन के आदेश को बदले की भावना से प्रेरित बताया और केंद्र सरकार पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने भी उच्च न्यायालय के फैसले को सही ठहराते हुए केंद्र सरकार पर अतिरिक्त 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट के आदेशों के तहत 25 हजार रुपये की धनराशि जारी की है। जबकि सुप्रीम कोर्ट के लगाए गए जुर्माने की राशि अभी जारी नहीं की है। इसी जुर्माने की राशि को प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा कराते हुए संजीव ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में सुझाव दिया है कि केंद्र सरकार अपने ईमानदार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के लिए एक विशेष कोष का भी गठन कर सकती है। इस फंड से उनकी तरह के भ्रष्टाचार से लड़ रहे अधिकारियों के विधिक खर्च को वहन करने में मदद की जा सकती है।
पहले मना किया था, इस बार स्वीकार किया
संजीव ने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि यह धनराशि एक नागरिक के रुप में उन्होंने प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा कराई है। संजीव ने पूर्व में मेगसायसाय पुरस्कार के रूप में मिले 19.35 लाख रुपये भी प्रधानमंत्री राहत कोष को भेजे थे। उस समय उनसे कहा गया था कि राहत कोष में सशर्त धनराशि स्वीकार नहीं की जाती है। संजीव ने उस समय इसे मौलिक अधिकार का हनन बताया था तो यह धनराशि स्वीकार की गई। इस बार प्रधानमंत्री राहत कोष ने उनकी ओर से भेजे गए 25 हजार रुपये के चेक बिना हीलाहवाली के स्वीकार कर लिया है।