केंद्र और प्रदेश सरकार ने अटल आयुष्मान योजना में मुफ्त इलाज की सुविधा देकर मरीजों को राहत दी है। लेकिन इलाज के दौरान महंगी जांच मरीजों के लिए आफत साबित हो रही है। जांच का खर्चा पांच हजार से अधिक होने पर मरीजों को जेब से देना पड़ रहा है। योजना में सरकार ने गरीबों के लिए पांच लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा तो दी है। लेकिन बीमारियों की जांच के लिए खर्च की सीमा तय कर दी है। इससे मरीजों को इलाज के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
आयुष्मान योजना में गोल्डन कार्ड धारक मरीज को सरकारी और सूचीबद्ध अस्पतालों में पांच लाख तक मुफ्त इलाज की सुविधा दी गई है। इसमें बड़ी बीमारियों की सर्जरी से लेकर दवाईयों के साथ छोटे मेडिकल टेस्ट भी निशुल्क है। लेकिन यदि किसी मरीज को एमआरआई, सिटी स्कैन, पैट स्कैन समेत ब्लड से संबंधित अन्य महंगी जांच करानी हैं तो इसके लिए पांच हजार की समय तय की गई है। इससे ऊपर के जांच कराने के लिए मरीज और तीमारदारों को भुगतान करना पड़ रहा है। योजना शुरू होने से पहले सरकार ने यह भी एलान किया था कि सरकारी अस्पतालों में दवाईयां व जांच की सुविधा उपलब्ध न होने पर निजी मेडिकल स्टोर और पैथोलॉजी लैब को योजना में सूचीबद्ध किया जाएगा। लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हो पाया है।
एमआरआई, सिटी स्कैन करना महंगा
सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए जो यूजर चार्ज की दरें तय की गई है। जिसमें एमआरआई, सिटी स्कैन, कैंसर के लिए पैट स्कैन सहित अन्य बड़े मेडिकल टेस्ट शामिल नहीं हैं। जबकि गंभीर रूप से बीमार मरीज या सड़क हादसे में घायल मरीज के कई तरह के मेडिकल टेस्ट किए जाते हैं।
एक परिवार को पांच लाख का इलाज
आयुष्मान योजना में एक परिवार को साल में पांच लाख का ही मुफ्त इलाज मिलेगा। यदि किसी परिवार में चार सदस्य हैं। एक सदस्य बीमार होने पर पांच लाख से अधिक खर्च होता है तो दूसरे सदस्य के बीमार होने पर योजना का लाभ नहीं मिलेगा। लेकिन एक सदस्य के इलाज पर दो लाख खर्च होते हैं तो दूसरे को तीन लाख का इलाज मिल सकता है।
आयुष्मान कार्ड धारक के लिए पैथोलॉजी व रेडियोलॉजी जांच की दरें
जांच आयुष्मान कार्ड धारक
ब्लड यूरिया 50
एक्सरे 160
हीमोग्लोबिन 18
सीबीसी 135
आरबीसी 50
ब्लड ग्रुप 50
प्लेटेलेट्स 50
अल्ट्रासाउंड 471
ईसीजी 120