सियासी दखलंदाजी और राजनीतिक शिकायतों से भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के मुख्यालय से अटैच करने पर आईएफएस लॉबी का मूड खराब है।
उत्तराखंड शासन के तौर-तरीके से आईएफएस अधिकारी असंतुष्ट हैं। प्रोटोकॉल में भी वे उपेक्षा का आरोप लगा रहे हैं। इस संबंध में भारतीय वन सेवा संघ मुख्यमंत्री, वन मंत्री और मुख्य सचिव के यहां जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराएगा। मंगलवार को मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने इस संबंध में जानकारी ली।
नेताओं की शिकायत पर एक साल में विभाग के चार डीएफओ मुख्यालय से अटैच किए गए हैं। इनमें रामनगर की डीएफओ कहकशां नसीम हाल में ही मुख्यालय से अटैच हुई हैं। वन भूमि पर श्मशान घाट के मामले में नियम-कानून बताने पर उन्हें यह सजा मिली है। इसके पहले केदारनाथ डीएफओ आकाश वर्मा को अगस्त, 2015 में मुख्यालय से अटैच किया गया था।
माना जा रहा है केदारनाथ में हेलीकॉप्टरों की उड़ान से वन्य जीवों के प्रभावित होने संबंधी रिपोर्ट भेजने पर उन्हें हटा दिया गया था। इसके बाद आकाश वर्मा अटैचमेंट पर हैं, उन्हें पोस्टिंग नहीं मिली है। इसी तरह नरेंद्र नगर डीएफओ विनय भार्गव को जून, 2015 और टौंस डीएफओ मयंक शेखर को मई, 2015 में मुख्यालय से अटैच कर दिया गया था। विभागीय सूत्रों का कहना है कि इन सभी डीएफओ की नेताओं ने शिकायत की थी।
कई मामले तो वन भूमि पर अवैध कब्जों के हैं। अफसरों के नियम-कानून बताने पर नेता भड़क गए और मंत्रियों से शिकायत कर दी। इसके बाद उन्हें अटैच कर दिया गया।
हाल में हुई भारतीय वन सेवा संघ की बैठक में इस मुद्दे को उठाया गया और नाराजगी जाहिर की गई। भारतीय वन सेवा संघ के अध्यक्ष प्रमुख वन संरक्षक (नियोजन) जयराज ने बताया कि बहुत जल्दी वन मंत्री और मुख्य सचिव से मिलकर अपनी असंतुष्टि व्यक्त करेंगे। जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री से भी मिलेंगे।