निजी चैनल के सीईओ उमेश कुमार की गिरफ्तारी से उत्साहित पुलिस की कार्यप्रणाली ने अन्य आरोपियों को बचाव का पूरा मौका दे दिया। एक-एक करके अन्य चारों आरोपी हाईकोर्ट से राहत पाने में कामयाब हो गए। इसके बाद उमेश पक्ष की तरफ से मुकदमे पर सवाल उठाते हुए निरस्त कराने को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा कर सरकार और पुलिस दोनों को बेचैन कर दिया।
अब कहीं न कहीं यह भी डर सताने लगा है कि यदि हाईकोर्ट में प्रभावी पैरोकारी नहीं हुई तो फैसला उनके खिलाफ भी जा सकता है। इसी आशंका को लेकर पुलिस अधिकारियाें ने सरकार के पैरोकारों के सामने पूरा ज्ञान उलट दिया।
सुझाव दिया है कि स्टिंग आपरेशन करने के पीछे की मंशा सरकार को अस्थिर करने की थी। ऐसे में हाईकोर्ट में केस की सुनवाई के दौरान बड़े वकीलों की मदद ली जाए, ताकि कानूनी लड़ाई को मजबूती से लड़ा जा सके। अब देखना यह है कि अधिकारियों की इस सलाह को सरकार के पैरोकार कितनी गंभीरता से लेते हैं।