प्रदेश में बीते कुछ साल में हुए ऐसे स्टिंग ऑपरेशनों की लंबी फेहरिस्त हैं, जिनके सच सेटिंग के खेल में खुफिया कैमरों में ही कैद रह गए।
घर के भेदी आयुष गौड़ की सटीक जानकारी पर ही पुलिस ने उमेश की कोठी और आफिस को खंगाला था। ऐसे में जब्त इलेक्ट्रानिक उपकरणों से कई राज खुल भी सकते हैं। बशर्ते जांच में पूरी तरह से निष्पक्षता और पारदर्शिता बरती जाए।
उत्तराखंड में स्टिंग ऑपरेशन का खेल कई सालाें से बदस्तूर चल रहा है। खासतौर से सीएम और बड़े नौकरशाह इसका शिकार होते रहे हैं। ऐसे स्टिंग ऑपरेशनाें की लंबी श्रंखला है। लेकिन उनमें से चुनिंदा स्टिंग ही सामने आ पाए और अधिकांश सेटिंग के खेल में छिपा लिए गए।
यह पहला मौका है जब स्टिंग प्रकरण को लेकर किसी तरह की कानूनी कार्रवाई हुई है। इस बार भी सीधे तौर पर कार्रवाई के बजाय स्टिंग करने वालाें के एक मोहरे के सहारे निशाना साधा गया हैं।
दरअसल, मुकदमा दर्ज कराने वाला आयुष गौड़ भी स्टिंग के खेल का राजदार रहा है। इसी का पूरा फायदा पुलिस और शीर्ष स्तर पर जुड़े लोगाें ने उठाया है।
पुलिस के पास पहले से ही जानकारी थी कि उमेश शर्मा के आवास और आफिस पर व्यापक पैमाने पर पुराने स्टिंग ऑपरेशनों का रिकार्ड मिल सकता है। इसी लिहाज से मुकदमे में गिरफ्तारी के साथ आवास और आफिस का सर्च वारंट लिया गया। ताकि पुराने स्टिंग का जखीरा बरामद कर इस पूरे खेल को बेनकाब किया जा सके।
बताया जा रहा है कि पुलिस अपने मकसद में काफी हद तक कामयाब रही है। उमेश के दफ्तर और आवास से नगदी के अलावा कंप्यूटर की हार्ड डिस्क, पैन ड्राइव, डीवीडी, लैपटॉप आदि काफी संख्या में इलेक्ट्रानिक उपकरण बरामद हुए हैं।
इनमें वर्तमान के अलावा पूर्व की सरकारों के समय में हुए स्टिंग ऑपरेशन की रिकार्डिंग होने का अनुमान लगाया जा रहा है। अब यह देखना है कि कोर्ट के आदेश पर इलेक्ट्रानिक उपकरणाें की फोरेंसिक जांच में किसी तरह का सच बाहर आ पाता हैं।