इस पूरे मामले में बड़ा तथ्य है कि सीएम से संबंध रखने वाले वो कौन लोग थे, जिनका स्टिंग किया गया। क्या रिकॉर्डिंग में कुछ आपत्तिजनक था।
आयुष गौड़ की तरफ से राजपुर थाने में दर्ज मुकदमे में कुछ लोगों की रिकॉर्डिंग का भी जिक्र किया गया है। क्या स्टिंग के बदले किसी तरह की ब्लैकमेलिंग की गई थी? क्या स्टिंग की असली स्क्रिप्ट यही है, या फिर उसमें किसी तरह का बदलाव हुआ है? बड़ा सवाल यह है कि मुख्यमंत्री और बड़े नौकरशाह से जुड़े मामले में कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हुई।
इन तमाम सवालों के जवाब अभी पुलिस अधिकारियों के पास नहीं हैं। हालांकि अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार का कहना है कि चैनल के आयुष गौड़ की तहरीर पर मुकदमा दर्ज हुआ है। विवेचना प्रचलित है, जिस तरह के तथ्य आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसी बीच रणनीति के तहत आयुष गौड़ को सोमवार को मीडिया के सामने लाने की तैयारी है, ताकि स्टिंग की पूरी कहानी पर मुहर लगवाई जा सके।