वर्ष 1965 और 1971 में भारत-पाक युद्ध में दून के दो दोस्त हवलदार बिसन सिंह और सूबेदार लाल बहादुर क्षेत्री (दोनों सेवानिवृत्त) ने साथ मिलकर आतंकियों की नींद उड़ाई थी। बिसन सिंह ने बताया कि दोनों की दोस्ती इतनी गहरी थी कि दोनों साथ में सेना में भर्ती हुए थे। जिसके बाद 1/9 गोरखा बटालियन में दोनों ने मिलकर देश की रक्षा की।
लाल बहादुर क्षेत्री ने बताया कि वर्ष 1965 युद्ध के दौरान उन्हें दाएं पैर में गोली भी लगी थी, जबकि बिसन सिंह के सिर में चोट लगने से वह कान से भी कम सुनते हैं। अब दोनों ने भारतीय वायुसेना की जवाबी कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि हमारी सेना ने जवानों की शहादत का मुंहतोड़ जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि पाक ने हमेशा पीछे से हमला किया है और हर बार भारत ने मुंहतोड़ जवाब दिया है।
पुलवामा में 14 फरवरी के हुए आतंकी हमले की के बाद भारतीय वायुसेना की जवाबी कार्रवाई से दून के रहने वाले बीएस अधिकारी को अपने पिता की शहादत की याद आ गई। बीएस अधिकारी के पिता नायब सूबेदार ईश्वर सिंह अधिकारी वर्ष 1965 में भारत-पाक युद्ध में शहीद हो गए थे।
संगम विहार गढ़ी कैंट में रहने वाले बीएस अधिकारी ने कहा कि जब भी सीमा पर तनाव होता है, उन्हें अपने पिता की बहादुरी याद आती है। वह चार भाई-बहन हैं। पिता के शहीद होने के वक्त चारों भाई-बहन छोटे थे। उन्होंने बताया कि छोटी उम्र में ही पिता का साया उठ गया था लेकिन पिता की बहादुरी के बारे में अक्सर आसपास के लोग बताते थे।