पति को प्रताड़ित करने वाली पत्नियां सावधान हो जाएं....उनके पति अब ज्यादा दिन ज्यादती बर्दाश्त नहीं करेंगे।
बीबियों के दर्द से ‘पीड़ित’ ऐसे कई पुरुष साथ-साथ आ गए हैं। परेशानियों को आपस में साझा करने के साथ पीड़ित पुरुषों ने संगठन बनाने का निर्णय लिया है।
इसके लिए 30 नवंबर को हल्द्वानी में बाकायदा एक गोष्ठी भी रखी है, जहां कुमाऊं और गढ़वाल से बीवियों से सताये गए लोगों का जमघट लगेगा। राज्य में पुरुष आयोग और हेल्पलाइन बनाने की मांग मुख्य एजेंडा होगा।
महिलाओं से जुड़े अपराधों को देखते हुए कई कड़े कानून बने। इसमें दहेज हत्या आदि पर रोक भी लगी। कई बार कथित तौर इस कानून की आड़ में या फिर डर दिखाकर कई बार बीवियां पति को प्रताड़ित करती हैं। पर अब ऐसे पत्नी पीड़ित पुरुष लामबंद होने लगेंगे।
बढ़ रही पुरुष अधिकार संरक्षण फोरम की सदस्यता
इन्होंने पुरुष अधिकार संरक्षण फोरम का गठन किया है, जिसकी ‘सदस्यता’ तेजी से बढ़ रही है। हल्द्वानी में ही अब तक 25 लोग संगठन से जुड़ चुके हैं। जिला महासचिव एडवोकेट गंगा प्रसाद ने बताया कि पुरुष उत्पीड़न के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। महिला कानून का काफी दुरुपयोग रहा है।
पुलिस भी हमेशा महिलाओं का साथ देती है। चाहे शिकायतकर्ता पुरुष ही क्यों न हो। हाल ही में खटीमा में पत्नी और सास-ससुर पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सचिन रस्तोगी नाम के युवक ने पुलिस से शिकायत की थी, मगर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, जिस कारण उसे आत्मदाह करना पड़ा।
इस मामले में पुलिसकर्मियों पर धारा 306 के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग शासन से की गई है। इसी तरह तमाम मामले सामने आए हैं। राज्य बनने से 2012 तक तो पुरुष उत्पीड़न का एक भी मुकदमा राज्य में दर्ज नहीं हुआ था। पुरुषों के आत्महत्या के मामले भी पिछले दस साल में लगातार बढ़े हैं।
पति ज्यादा हो रहे उत्पीड़न का शिकार
पत्नी से ज्यादा पति उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं। महिला हेल्पलाइन के आकड़ों के मुताबिक साल भर में अब तक एक हजार मामले आए, जिसमें से 546 मामले पुरुष उत्पीड़न के हैं। पारिवारिक न्यायालय में तलाक के 158 मुकदमे विचाराधीन हैं। इनमें से उसमें से 117 पुरुषों ने तलाक के लिए वाद दायर किया है।
महिला हेल्पलाइन में इस साल अब तक करीब 600 शिकायतें आई हैं। जिसमें से करीब 130 शिकायतें पुरुषों की थीं। इनमें से लगभग सभी मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। कुछ मामले कोर्ट भेज दिए गए हैं।
2011 से अटकी पुरुष आयोग की फाइल
फोरम की ओर से पत्नी पीड़ित पुरुषों को कानूनी मदद और काउंसलिंग दी जा रही है। राज्य में पुरुष आयोग और हेल्पलाइन बनाने की मांग 2011 से की जा रही है। लेकिन तब से आज तक इसकी फाइल शासन में अटकी है। जिसे आगे चलाने के लिए मुख्यमंत्री का पत्र लिखा गया है।
- अजय कौशिक, अध्यक्ष पुरुष अधिकार संरक्षण फोरम