अजय की आत्महत्या को लेकर पुलिस के विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं। एक तरफ सीओ ऋषिकेश वीरेंद्र सिंह रावत घटना का समय दोपहर 2 बजे के आसपास बता रहे हैं। दूसरी ओर वरिष्ठ उपनिरीक्षक मनोज नैनवाल का कहना है कि अजय यादव ने मंगलवार की शाम करीब 6 बजे आत्महत्या की। सूचना मिलने के बाद उसे एम्स ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इस विरोधाभाषी बयान ने पुलिस की भूमिका पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। सीओ वीरेंद्र सिंह रावत से कल्याणी हत्याकांड के बयान को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम सोच रहे थे कि अजय की सेहत में कुछ सुधार हो जाय तो बयान दर्ज करें।
अंदाजा नहीं था कि घटना इस तरह मोड़ लेगी। सवाल ये भी उठ रहे हैं कि अजय ने हत्याकांड को अंजाम देने के बाद खुद को भी मिटाने की कोशिश की थी। इसके बावजूद पुलिस आरोपी की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पाई।
गौरतलब है कि बनखंडी निवासी कल्याणी यादव की 28 अगस्त 2019 को घर मे घुसकर चाकू से निर्मम हत्या कर दी गई थी। हत्या के आरोपी सुमन विहार निवासी अजय यादव ने घटना को अंजाम देने के बाद खुद को भी गले मे चाकू मारकर आत्महत्या की कोशिश की थी।
उस वक्त अजय यादव को गंभीर हालत में एम्स में भर्ती करवाया गया था। चिकित्सकों ने उसकी जान बचा ली थी। हालत में सुधार होने के बाद एम्स चिकित्सकों ने अजय को एक सितंबर को छुट्टी दे दी थी। तब से वह घर पर ही बेड रेस्ट कर रहा था।
बताते चलें कि कल्याणी और अजय में शादी को लेकर विवाद पैदा हुआ और नतीजा जानलेवा साबित हुआ। दस्तावेजों के मुताबिक दोनों ने 19 नवम्बर 2018 में कोर्ट मैरिज भी गुपचुप तरीके से की थी। बाद में हत्याकांड से एक दिन पहले ही तलाक का आवेदन भी किया था जो कि खारिज हो गया था।
पुलिस को अजय को अपनी अभिरक्षा में लेना चाहिए था। ये सरासर पुलिस की लापरवाही है। इसकी जांच करवानी चाहिए कि आरोपी ने किन परिस्थितियों में आत्मघाती कदम उठाया। वहीं अगर वह बयान देने में अक्षम था तो फांसी कैसे लगा ली। अहम पहलू यह है कि घटना के वक्त पुलिस अभिरक्षा क्या कर रही थी। पुलिस से इसका जवाब तलब करना चाहिए।
विकेश सिंह नेगी, अधिवक्ता क्रिमिनल केस