फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जायदाद के लिए एक मां ने रची खौफनाक साजिश, पढ़ें

Sun, 17 May 2015 05:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
विज्ञापन
विज्ञापन
जायदाद का लालच एक दंपति पर इतना ज्यादा चढ़ गया कि उसने 'अपने' ही बच्चे को उठवा लिया।
विज्ञापन


रुड़की में बेलड़ी गांव से लापता साढ़े चार साल के मासूम राजेश्वर को पुलिस ने बरामद कर लिया है। वह लापता नहीं हुआ था बल्कि ताऊ-ताई ने संपत्ति के विवाद के चलते अपहरण कराया था। अपहरण के बाद 15 लाख की फिरौती मांगी गई थी।

शक न हो इसके लिए अपने पांच साले के बेटे कृष्णा को भी उसके साथ लापता बता दिया था। पुलिस ने ताऊ और ताई के अलावा अपहरण में शामिल रहे तीन अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है।
विज्ञापन


शनिवार को कोतवाली में आयोजित पत्रकार वार्ता में एसएसपी स्वीटी अग्रवाल ने बताया कि 10 मई को बेलड़ी गांव निवासी दिनेश पुत्र चमन लाल ने कोतवाली में अपने बेटे कृष्णा और छोटे भाई सुरेश के बेटे राजेश्वर की गुमशुदगी दर्ज कराई थी।

गांव के तालाब में डूब जाने की आशंका के चलते तालाब से पानी भी निकलवाया गया, लेकिन बच्चों का सुराग नहीं लगा। पुलिस को शक होने पर दिनेश की पत्नी संयोगिता से कड़ाई से पूछताछ की तो उसने सारा राज उगल दिया।
विज्ञापन

देवर की बेटी के नाम जमीन करने पर नाराज

संयोगिता ने बताया कि उसके ससुर ने कुछ समय पहले अपने हिस्से की जमीन छोटे बेटे सुरेश की बेटी सलोनी के नाम पर कर दी थी, जिससे वह नाराज थी। ऐसे में उसने सुरेश के बेटे का अपहरण कराने और उसे छोड़ने के बदले पैसे ऐंठने की योजना बनाई।

योजना में उसने कुछ साल पहले तक अपने यहां किरायेदार रहे दीपक शर्मा पुत्र जनेश्वर निवासी गदरजुड्डा, उसके साथी रवि उर्फ सूरज और सुनील उर्फ सोनू निवासी मोहल्ला खालसा मंगलौर के साथ राजेश्वर का अपहरण करा दिया।

शक न हो इसके लिए अपने पांच साल के बेटे कृष्णा को भी उनके साथ भेज दिया। तब से यह लोग दोनों बच्चों को अलग-अलग स्थान पर रखते रहे।

शुक्रवार शाम पुलिस ने रावली महदूद के पास रामधाम कॉलोनी निवासी स्थित एक निर्माणाधीन मकान पर छापा मारकर दोनों बच्चों को बरामद कर लिया।

पूछताछ में पता चला कि संयोगिता ही नौ मई को दोनों बच्चों को जंगल में दीपक और उसके साथियों को सौंपने गई थी। एसएसपी ने बताया कि इसके बाद दीपक इन बच्चों को लेकर गदरजुड्ड़ा गया, लेकिन वहां ठिकाना न मिलने पर दोनों बच्चों को रावली महदूद गांव में ले गया था।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें