तेंदुए को मारने के बाद कुछ लोगों ने इसके आदमखोर होने पर सवाल उठाए। इस पर विभाग ने तेंदुए को सबसे करीब से देखने वाली ढाई वर्षीय मासूम हर्षित की माता से भी तेंदुए की पहचान कराई। तेंदुए के मरते ही हर्षित की मां भी अपने बेटे को याद करके रो पड़ीं। हर्षित के पिता देवेंद्र सिंह ने बताया कि शाम को तेंदुए के मारे जाने के दौरान परिवार समेत घर पर ही थे। रेंजर संचिता वर्मा तेंदुए के ढेर होने के तुरंत बाद हर्षित के चाचा और अन्य ग्रामीणों के साथ घर आईं। रेंजर ने खुद ही मासूम की माता हेमा को फोन पर तेंदुए की फोटो दिखाई। फोटो देखकर हेमा ने इसी तेंदुए के आदमखोर होने की पुष्टि की।
क्षेत्र में अब भी दहशत
क्षेत्र में और भी तेंदुए होने से अब भी लोगों में भय का माहौल है। वन विभाग ने अन्य तेंदुओं को भी पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए हुए हैं। उन्हें भी शीघ्र पकड़ने का आश्वासन दिया है। वन क्षेत्राधिकारी संचिता वर्मा ने बताया कि आदमखोर तेंदुआ लगभग नौ वर्ष का मादा है। पूंछ समेत उसकी कुल लंबाई छह फीट दस इंच और ऊंचाई दो फीट पांच इंच है। उन्होंने बताया कि तेंदुए का एक दांत, पंजे का एक नाखून टूटा हुआ था। जबकि अन्य नाखून भी घिसे हुए हैं।
शिकारियों को कई बार छकाया तेंदुए ने
तेंदुए को मारने के लिए शिकारी सैफी आसिफ और हरीश धामी पिछले बुधवार की रात 11:30 बजे पेटशाल पहुंचे और उसी रात घटनास्थल पर पहुंच गए। इस दौरान शिकारियों ने विभाग की टीम के साथ जंगल को भांपने की कोशिश की। अगले दिन बृहस्पतिवार को शिकार की तलाश में वह जंगल में बने मचान में चढ़कर बैठ गए पर तेंदुआ नजर नहीं आया। शिकारी राजीव सोलोमन ने बताया कि शुक्रवार रात 10:30 बजे मादा तेंदुआ पहली बार नजर आई। वह इतनी शातिर थी कि जरा सी हलचल होते ही वह जंगलों में ओझल हो गई। इसके बाद चार दिन तक कोई तेंदुआ नजर नहीं आया। 15 जुलाई को तेंदुए फिर नजर आया लेकिन शिकारियों के हत्थे नहीं चढ़ा। बृहस्पतिवार शाम तेंदुआ नजर आया तो शिकारियों ने बिना मौका गंवाए आदमखोर को ढेर कर दिया।
तेंदुए को रात में शिकारियों ने मार गिराया था। शुक्रवार को उसका पोस्टमार्टम कर शव को जला दिया गया है। देर रात ग्रामीणों से तेंदुए की पुष्टि की गई, हर्षित के घर से 200 मीटर दूरी पर तेंदुआ ढेर हुआ।
- संचिता वर्मा, वन क्षेत्राधिकारी।