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...तो बंद हो जाएंगे ये सौ साल पुराने 'ATM'

Wed, 16 Apr 2014 12:41 PM IST
रविंद्र थलवाल/अमर उजाला, उत्तरकाशी
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एक शताब्दी पहले भले देशभर में एमटीएम नहीं थे, लेकिन उत्तराखंड के चारधाम यात्रा मार्ग पर एटीएम थे। जिनमें भोजन एवं ठहरने की निशुल्क व्यवस्था के साथ ही यात्री किसी भी समय पैसा निकाल सकता था।
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चौंकिए मत आज भी यह एमटीएम यानि कि बाबा काली कमली धर्मशालाएं यात्रा मार्ग पर मौजूद हैं। इनमें कुछ तो बाढ़, भूस्खलन, आगजनी की भेंट चढ़ गए, तो कुछ सरकारी उपेक्षा के कारण अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।

एटीएम की तरह करती थीं काम

ये धर्मशालाएं उस समय एटीएम का काम करती थीं। यात्रा मार्ग पर लुटने के भय के कारण यात्री ऋषिकेश या कोलकाता की धर्मशाला में पैसा जमा करा देता था, जहां से उसे एक रसीद मिलती थी।

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इसके बाद यात्री चारधामों यात्रा मार्ग पर अपनी जरूरत के अनुसार किसी भी धर्मशाला से पैसा ले सकता था। निकाली गई धनराशि रसीद के पीछे लिखी जाती थी।

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उत्तराखंड के चारधाम यात्रा मार्ग पर आज भी काली कमली धर्मशालाओं में यह सुविधाएं हैं, लेकिन आधुनिकता तथा सरकारी उपेक्षा के कारण अब यह धर्मशालाएं बंदी की कगार पर हैं।

चारधाम यात्रा शुरू करने में रहा है विशेष योगदान

जिस चारधाम यात्रा को शुरू कराने में उत्तराखंड सरकार के हाथ पांव फूल रहे हैं, उसी यात्रा को शुरू कराने में 135 साल पूर्व अकेले बाबा काली कमली का विशेष योगदान रहा है।

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उस समय यात्रा ऋषिकेश से पैदल हुआ करती थी। बाबा ने ऋषिकेश से लेकर चारधामों तक हर नौ मील पर अन्न क्षेत्र (धर्मशालाएं) खुलवाए, जिनमें यात्रियों को भोजन-ठहरने की निशुल्क व्यवस्था थीं।

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जिले में धरासू, गगनानी, डिडसारी, स्यानाचट्टी, वाणगांव, धराली की धर्मशालाओं का बरसों पूर्व बाढ़, भूस्खलन और आगजनी की घटनाओं से अस्तित्व मिट चुका हैं। शेष उत्तरकाशी, भैरवघाटी, गंगोत्री, हनुमानचट्टी, जानकीचट्टी और यमुनोत्री धर्मशाला भी बंदी की कगार पर है।

कौन थे बाबा काली कमली

बाबा कमली का वास्तविक नाम स्वामी विशुद्धानंद महाराज था, लेकिन काला कंबल ओड़ने का शौक होने के कारण उन्हें बाबा काली कमलीवाला के नाम से जाना था।

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उनका जन्म वर्ष 1888 में पंजाब के गुजरानवाला (अब पाकिस्तान में) के कोकना नामक ग्राम में हुआ। चारधाम यात्रा को शुरू कराने में उनका विशेष योगदान रहा है।

बाबा ने ऋषिकेश से चारधाम तक पैदल यात्रा मार्ग पर हर नौ मील पर यात्रियों की सुविधा के लिए अन्न क्षेत्र खुलवाए।
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खतरे की जद में उत्तरकाशी की धर्मशाला

300 यात्रियों की क्षमता वाली बाबा काली कमली धर्मशाला उत्तरकाशी पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। बीते साल की बाढ़ से धर्मशाला का एक हिस्सा बाढ़ में बह गया था।

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इससे 25 कमरे भी क्षतिग्रस्त हो गए थे, लेकिन अभी तक शासन-प्रशासन की ओर से धर्मशाला को सुरक्षित करने के लिए कोई कवायद शुरू नहीं की गई।

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बाबा काली कमली धर्मशालाओं में आज भी साधु महात्माओं और गरीब यात्रियों के लिए निशुल्क खाने-रहने की व्यवस्था है, लेकिन सरकारी उपेक्षा के कारण इनमें अधिकतर धर्मशालाएं बंदी की कगार पर है। सरकार को इन धर्मशालाओं को पुनर्जीवित करने के लिए प्रयास करने चाहिए।
-अरुण कुमार झा, प्रबंधक, बाबा काली कमली धर्मशाला उत्तरकाशी।
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