उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से करीब सौ डॉक्टरों की यात्रा मार्ग पर ड्यूटी लगाई जाएगी। चारों धामों के साथ ही पूरे यात्रा मार्ग पर डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। लेकिन इससे उन अस्पतालों में दिक्कत बढ़ जाएगी, जहां से लेकर डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। जिन अस्पतालों से डॉक्टर हटाए जाएंगे, वहां मरीजों की दिक्कत बढ़नी तय है।
गढ़वाल और कुमाऊं के अलग-अलग अस्पतालों से डॉक्टरों की ड्यूटी लगेगी। इससे चार धाम यात्रा मार्ग पर यात्रियों और आम लोगों को तो राहत मिलेगी लेकिन उन लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी, जहां से डॉक्टर ड्यूटी पर लगाए जाएंगे।
विभागीय सूचना के अनुसार, 48 सुपर स्पेशलिस्ट, 50 एमबीबीएस और छह महिला डॉक्टरों को चार धाम यात्रा मार्ग पर ड्यूटी करनी है। सबसे ज्यादा दिक्कत उन अस्पतालों पर निर्भर मरीजों को झेलनी होगी, जहां केवल एक या दो डॉक्टर ही तैनात हैं। डॉक्टरों की यात्रा मार्ग पर ड्यूटी लगने के बाद उन अस्पतालों में मरीजों को उपचार नहीं मिल सकेगा।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी रोटेशन पर ड्यूटी लगने से दिक्कतें कम होने का दावा कर रहे हैं। उनका तर्क है कि रोटेशन पर ड्यूटी लगने से सभी डॉक्टर एक साथ नहीं जाएंगे। वैसे भी चार धाम यात्रा जैसे महत्वपूर्ण आयोजन में देश-विदेश से आने वाले यात्रियों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में है।
संयुक्त निदेशक डा. जेपी देवशाली ने बताया कि डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की ड्यूटी रोटेशन पर एक-एक माह के लिए लगाई जानी है। चार धाम यात्रा का प्रदेश के लिए बहुत अधिक महत्व है, इसलिए उसमें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी है। अन्य अस्पतालों में दिक्कत न हो, इसके भी प्रयास किए जाएंगे।