घटनाओं में कमी लाने को स्थानीय लोगों का सहयोग लिया जा रहा है। इसमें सूचनाओं का अहम योगदान है, जल्द सूचना मिले इसके लिए बैठक करने के साथ सोशल मीडिया समूह बनाए गए हैं।
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राज्य मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को लेकर संवेदनशील है। जनवरी से सितंबर तक वन्यजीव के हमले की 462 घटनाएं हो चुकी हैं। प्रदेश में मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती बढ़ी है। इस वर्ष जनवरी से सितंबर तक 55 लोगों की असमय मृत्यु वन्यजीवों के हमलों में हुई है, वहीं 407 लोग घायल हुए। इसमें तेंदुए के हमले में 17 लोगों की मौत और 75 घायल हुए। बाघ के हमले 12 और चार लोगों की मृत्यु हुई है। वहीं, भालू के हमले में चार लोगों की जान गई और 40 घायल हुए हैं। सांप के काटने से 10 की मौत और 102 घायल हुए।
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मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल धीरज पांडे बताते हैं कि इन घटनाओं में कमी लाने को स्थानीय लोगों का सहयोग लिया जा रहा है। इसमें सूचनाओं का अहम योगदान है, जल्द सूचना मिले इसके लिए बैठक करने के साथ सोशल मीडिया समूह बनाए गए हैं। इसमें वन विभाग, राजस्व और स्थानीय लोगों को शामिल किया गया है। जो संवेदनशील जगह है, उनको चिह्नित करने के साथ टीमों को तैनात करने के साथ गश्त बढ़ाई गई है।
एआई कैमरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। वन संरक्षक आकाश वर्मा बताते हैं कि संवेदनशील जगहों संसाधनों का उपयोग करते हुए घटनाओं में कमी लाने का प्रयास किया रहा है। बदरीनाथ, रुद्रप्रयाग और पौड़ी वन प्रभाग में संवेदनशील जगह चिह्नित है, जहां पर सुरक्षात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। सोलर लाइट लगाना, एनाइडर लगाने का काम हुआ है। इसके अलावा और अतिरिक्त संसाधन भी मांगा गया है।