प्रदेश के 881 अपग्रेड स्कूलों का अलग से संचालन कैसे होगा, इसका मामला शासन में अटका हुआ है। जबकि अपग्रेड किए गए जूनियर हाईस्कूलों के अलग से संचालन की मुख्यमंत्री की घोषणा हो चुकी है और इसके बाद निदेशालय से शासन को प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है।
प्रदेश में अपग्रेड किए गए जूनियर हाईस्कूलों में हाईस्कूल और जूनियर हाईस्कूलों का अलग से संचालन होना था। 2014 अक्तूबर में मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद निदेशालय की ओर से शासन को एक प्रस्ताव भेजा गया। निदेशालय की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि अलग-अलग स्कूलों के संचालन से हर साल 85 करोड़ 48 लाख रुपये का खर्च आएगा, लेकिन शासन में निदेशालय की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर अमल नहीं किया गया।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि विभाग में इन दिनों शिक्षकों के वेतन तक की समस्या बनी है। ऐसे में स्कूलों के अलग संचालन का मामला फिलहाल संभव नहीं है। यही वजह है कि विभाग की ओर से स्कूलों के अलग संचालन के बजाए इन दिनों विद्यालयों में त्रिस्तरीय व्यवस्था लागू किए जाने की कवायद की जा रही है।
इनका है कहना
मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री कई बार स्कूलों के अलग संचालन का आश्वासन दे चुके हैं। 2014 में मुख्यमंत्री ने इसकी घोषणा भी की, लेकिन मामला शासन में उलझा हुआ है।
-दिग्विजय चौहान, प्रांतीय महामंत्री प्राथमिक शिक्षक संघ
स्कूलों के अलग संचालन के बजाए विभाग में त्रिस्तरीय व्यवस्था लागू की जाए। इससे शिक्षक प्राथमिक से प्रमोशन लेकर एलटी संवर्ग में आ सकेंगे।
- सतीश घिल्डियाल, संयुक्त मंत्री जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ