उत्तराखंड में अपने घर का सपना देखने वाले गरीबों को अब हाउसिंग लोन के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
प्रधानमंत्री आवास योजना और उत्तराखंड जन आवास योजना के तहत नेशनल हाउसिंग बैंक (एनएचबी) ऐसे लोगों को लोन उपलब्ध कराएगा। बैंक उसी आवास को मोडगेज के रूप में तब तक अपने पास रखेगा, जब तक लोन की किस्तें फाइनल नहीं हो जाती। पूरी किस्त चुकाने के बाद ही उस मकान की रजिस्ट्री लाभार्थी के नाम की जाएगी।
गरीब और कमजोर वित्तीय स्थिति वाले लोगों को लोन देने में बैंक अक्सर आनाकानी करते हैं। ऐसे लोगों के पास आमतौर पर लोन के सापेक्ष देने के लिए गारंटी नहीं होती है। जिसके कारण उन्हें बैंक लोन नहीं मिल पाता है।
विशेषकर मकान या प्रॉपर्टी खरीदने में उन्हें सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। लेकिन अब नेशनल हाउसिंग बैंक ऐसे लोगों को लोन उपलब्ध कराएगा। इसके बदले में उन्हें वही प्रॉपर्टी गारंटी के रूप में बैंक में जमा करानी होगी, जिसे वह लोन की रकम से खरीदने जा रहे हैं। प्रदेश में जन आवास योजना में गरीबों को इसका लाभ मिल सकेगा। योजना के लिए सरकार हुडको से लोन लेने जा रही है। ऐसे में सरकार आवास बनाने के बाद उसका आवंटन लाभार्थियों में कर देगी।
लाभार्थियों को एनएचबी प्रॉपर्टी के लिए लोन उपलब्ध कराएगा। यह लोन लाभार्थी को देने के बजाय फ्लैट की कीमत के रूप में सीधे हुडको को दिया जाएगा। ऐसे फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं की जाएगी। उसके सभी कागजात एनएचबी के पास रहेंगे। लोन की किस्तें चुकाने के बाद ही लाभार्थी के नाम रजिस्ट्री होगी।
बनेंगे 35 हजार आवास
उत्तराखंड जन आवास योजना के तहत प्रदेश में 35 हजार आवास बनाने की योजना है। जिसके पहले चरण की शुरूआत रुद्रपुर से की जा चुकी है। यहां करीब दो हजार आवास तैयार किये जा रहे हैं। इसके अलावा प्रदेश के अन्य स्थानों पर भी आवास बनाए जाने हैं। इसमें केंद्र की हाउसिंग फॉर ऑल और प्रधानमंत्री आवास योजना के फंड का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
20 हजार आवेदन
रुद्रपुर में बन रहे दो हजार फ्लैट्स को खरीदने के लिए लोगों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। दो हजार आवासों के लिए अभी तक बीस हजार से अधिक आवेदन आए हैं। आचार संहिता खत्म होने के बाद लाभार्थियों को फ्लैट्स का आवंटन किया जाएगा।
सरकार और लाभार्थी दोनों को लाभ
एनएचबी से लोन मिलने के बाद सरकार और लाभार्थी दोनों को फायदा होगा। ऐसा होने से योजना के फ्लैट की रकम के रूप में लिया गया लोन जल्दी चुकाया जा सकेगा। जिससे सरकार को अतिरिक्त ब्याज नहीं देना होगा। वहीं लाभार्थियों के डिफाल्टर होने की स्थिति में सरकार को नुकसान नहीं होगा। दूसरी ओर लाभार्थियों को एक साथ अपनी जेब से पैसा नहीं लगाना पड़ेगा। उसी प्रॉपर्टी पर लोन मिलने के चलते अतिरिक्त गारंटी भी नहीं देनी पड़ेगी।