उत्तराखंड सरकार की अतिथि गृह आवास (होम स्टे) योजना नियमों में उलझकर रह गई है। विकास प्राधिकरणों के अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) न देने के कारण प्रदेश में होम स्टे के लाइसेंस जारी नहीं हो पा रहे हैं। अकेले दून जिले में ही पर्यटन विभाग ने होम स्टे के 72 आवेदनों पर ‘स्टे’ लगा है।
पर्यटन और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य में होम स्टे योजना की शुरूआत की गई थी। उत्तराखंड गृह आवास (होम स्टे) नियमावली प्रथम संशोधन-2016 के अनुसार, इस योजना के लिए वही व्यक्ति आवेदन कर सकता है, जिसका यहां पर अपना आवासीय भवन हो और वहां अपने परिवार समेत रहता हो।
लाइसेंस मिलने पर टूरिस्ट गेस्ट हाउस संचालित करने के बावजूद यह पूरी तरह नान कॉमर्शियल श्रेणी में आएगा और विभिन्न विभागों से लगने वाले टैक्स घरेलू दरों पर देय होंगे। नियमावली का वह नियम कि, प्रदेश के ऐसे क्षेत्र जो विकास प्राधिकरण और ग्राम पंचायत या स्थानीय निकाय दोनों के अधीन आते हों, वहां पर विकास प्राधिकरण की मंजूरी जरूरी होगी, दिक्कत बन गया है।
एमडीडीए, साडा, हरिद्वार विकास प्राधिकरण आदि प्राधिकरण व्यवसायिक और अव्यवसायिक श्रेणी भवनों के अपने नियम कायदे होने का तर्क देकर एनओसी नहीं दे रहे हैं। जिला पर्यटन अधिकारी सीमा नौटियाल ने बताया कि इसके चलते दून में अभी 72 आवेदन लंबित हैं।
यह मामला संज्ञान में आया है। इससे होम स्टे के लाइसेंस जारी करने में तकनीकी दिक्कत आ रही है। इसके समाधान के लिए सेल्फ एफिडेविट की व्यवस्था अमल में लाई जाएगी। इसमें आवेदक एफिडेविट देगा कि वह इसमें ऐसी कोई भी गतिविधि संचालित नहीं करेगा, जो योजना की शर्तों के विरुद्ध हो। जल्द ही इसके आदेश जारी कर दिए जाएंगे।
- शैलेश बगोली, सचिव पर्यटन