‘हाउस वाइफ ने परिवार संभालने की भूमिका का चयन स्वयं ही किया है, वर्ना यह तो देश भी संभाल सकती हैं।’
आज का ‘अमर उजाला’ अंक आपके हाथों में है, वह प्रदेश की चार हाउस वाइफ की देख-रेख में तैयार किया गया है। उन्होंने शहर की हाउस वाइव्स की पसंद का तिनिधित्व किया।
संवाददाताओं ने उनकी पसंद के हिसाब से खबरें लिखीं। चारों हाउस वाइफ ‘अमर उजाला हाउस वाइफ डे’ के लिए विशेष गेस्ट एडिटर पैनल की मेंबर हैं। सुबह की मीटिंग में उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि किस खबर में क्या-क्या तथ्य जोड़ने और कौन सी खबर महिलाओं को अधिक पसंद आएगी।
कौन सी खबर किस पेज पर जाएगी इसका फैसला भी किया। मंजे हुए संपादक की तरह राय दी। अमूमन गेस्ट एडिटर कोई सेलिब्रेटी ही होता है, मगर ‘अमर उजाला’ ने हाउस वाइव्स को सेलिब्रेटी बना दिया।
गेस्ट एडिटर्स की कलम से
अमर उजाला ने वाकई अभिनव पहल की है। हाउस वाइफ को ऐसा मंच दिया। हम कभी सोच भी नहीं सकते थे। हमेशा समाज में अपनी पहचान के लिए प्रयास करते रहते हैं, लेकिन हमने अमर उजाला के रिपोर्ट्स की मीटिंग ली। उन्हें अखबार के लिए सुझाव दिए। अमर उजाला ने हमें गेस्ट एडिटर बनाकर समाज में हमारे सम्मान को कई गुना बढ़ा दिया। अमर उजाला का यह प्रयास जारी रहे और इसी तरह से हाउस वाइव्स को मौका मिलता रहे।
- नितिन हटवाल, अपर नत्थनपुर
घर और बच्चों के बीच से कभी समय ही नहीं मिला जो अपने बारे में सोच पाती। हाउस वाइफ दिनभर घर का काम करती हैं फिर भी लोग यही कहते हैं कि तुमने किया क्या? मुझे अपने ससुराल वालों का पूरा सपोर्ट मिलता है, लेकिन हूं तो हाउस वाइफ ही। मैं कभी अकेले कहीं नहीं निकली। अकेले जाने में हमेशा डरती रही। पहली बार अमर उजाला के कार्यक्रम में खुद आई, चुनी भी गई। इस गेस्ट एडिटर कॉम्पिटीशन ने मुझ में नया आत्मविश्वास जगा दिया।
- प्रीति गुप्ता, रुड़की
अमर उजाला की गेस्ट एडिटर बनने से बेहद खुश हूं। सुबह उठते ही सबसे पहले पापा का फोन आया। इसके बाद दिनभर लोग बधाई देते रहे। मैं अमर उजाला की नियमित पाठक हूं। इसमें छपने वाली खबरों पर भरोसा करती हूं। अमर उजाला इस जगह पहुंचा देगा, सोचा नहीं था। अमर उजाला की गेस्ट एडिटर बनकर खुद को बेहद गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। अखबार में हर वर्ग के लिए खबर दी जाती है, जो मुझे बेहद अच्छा लगता है।
- उर्मिला कंडवाल, सीमाद्वार
जब अमर उजाला से फोन आया तो कोटद्वार से यहां तक आना मुश्किल लग रहा था। साथ में छोटा बच्चा भी है। पति ने हिम्मत जगाई और लेकर आए। गेस्ट एडिटर की परीक्षा दी। मुझे बहुत डर लग रहा था, लेकिन पति को पूरा भरोसा था। यही कारण था कि उन्होंने रिजल्ट आने से पहले ही दून में ठहरने की तैयारी कर ली। मैं अमर उजाला की गेस्ट एडिटर बनूंगी, कभी सोचा नहीं था। संवाददाताओं से बातचीत कर बेहद खुशी हुई। कुछ खबरों पर विशेष कार्य करने को भी हमने कहा।
- निकिता रावत, कोटद्वार