देहरादून के बाहरी क्षेत्रों में स्वकर प्रणाली (सेल्फ एसेसमेंट) के तहत टैक्स लगाने के बाद अब शहर में 50 हजार से अधिक पुराने भवनों में किराएदारी की बजाए कारपेट एरिया के हिसाब से कर लगेगा। माना जा रहा है कि नए सिरे से कर लगने पर पुराने भवनों का कर बढ़ेगा।
देहरादून नगर निगम ने पुराने भवनों पर नए सिरे से कर लगाने की कवायद शुरू कर दी है। अभी तक पुराने भवनों में किराएदारी के हिसाब से टैक्स लगता था, जिस कारण एक मोहल्ले में एक समान घर में टैक्स अलग-अलग रहता था। ऐसे में अब नगर निगम ने कारपेट एरिया के तहत टैक्स लगाने का निर्णय लिया है। किराएदारी के तहत कई भवनों के कर कम हैं।
देखा गया है कि लोग मकान को किराए पर दे देते हैं, लेकिन निगम के कर्मचारियों को बता देते हैं कि वह कमरा अपने प्रयोग में ला रहे हैं। अब कारपेट एरिया में ऐसा नहीं चल पाएगा। भवन का जितना एरिया होगा, वह निगम को बताना होगा। भवन के मालिक को आवेदन फार्म के साथ ही अपने भवन की रजिस्ट्री और नक्शा देना होगा।
फिर जिस इलाके का जितना कारपेट रेट होगा, उस हिसाब से भवन कर तय किया जाएगा। इसके तहत पुराने भवनों में कर लगाने की कवायद की गई है। मोहल्लों में फार्म बांटना शुरू कर दिया गया है। टैक्स तय करने के लिए नगर निगम के स्तर पर शिविर भी लगाए जा सकते हैं।
माना जाता है कि कारपेट एरिया के तहत पुराने भवनों में कर लगता है तो जहां कर में समानता आ जाएगी, वहीं पुराने भवनों का कर भी बढ़ जाएगा।
कारपेट दरों में विवाद
भले ही नगर निगम ने स्वकर प्रणाली से कर लगाना शुरू कर दिया है, लेकिन मोहल्लों की कारपेट दरों में विवाद बरकरार है। निगम ने जल्दबाजी में वार्डों में कारपेट की दरें तय की। इसका नतीजा है कि एक जैसे वार्डों में दरें अलग-अलग हैं। इस मामले में नगर निगम में कई शिकायतें आई हुई हैं।
नगर निगम अपने स्तर पर दरों में संशोधन भी नहीं कर सकता है, क्योंकि एक्ट में साफ है कि एक बार दर तय हो जाने के बाद दो साल बाद ही दरें संशोधित की जा सकती हैं, इसलिए निगम ने शासन से कहा है कि उसे दरों में संशोधन की मंजूरी दी जाए।
स्टाफ है कम और काम ज्यादा
कारपेट एरिया के तहत कर लगाने की प्रक्रिया के चलते नगर निगम को कर्मचारियों की कमी महसूस हो रही है, क्योंकि इस काम को करने के लिए निगम के पास पर्याप्त कर्मचारी नहीं है।
आवेदन जमा करने, आवेदनों की जांच करने, फार्म बांटने, शिविर लगाने से लेकर कर की फाइल तैयार करने में कई कर्मचारियों की जरूरत है। ऐसे में आने वाले दिनों में निगम को कर लगाने की प्रक्रिया में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।