- ब्रांड में अब तक कुल 22 ट्रेडमार्क पंजीकृत, तीन हजार से अधिक महिलाओं को रोजगार
- प्रधानमंत्री ने दिसंबर 2023 में की थी ब्रांड की लांचिंग
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। महिला समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए बनाए गए हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड ने दो साल में 3.7 करोड़ का कारोबार पार कर लिया है। ब्रांड में अब तक 22 ट्रेडमार्क पंजीकृत किए गए। तीन हजार से अधिक महिलाओं को रोजगार मिला हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2023 को हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड की लांचिंग की थीं। इस ब्रांड के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूह, किसान, ग्रामीण उद्यमियों की ओर से बनाए गए उत्पादों की मार्केटिंग व ब्रांडिंग की जा रही है। बीते दो साल में उत्पादों की बिक्री का आंकड़ा 3.7 करोड़ के पार पहुंच गया है। अब हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड के उत्पाद ऑफलाइन के साथ ही ई कामर्स साइट जियो मार्ट, अमेजन, ब्लिंकिट, बिग बास्केट पर उपलब्ध हैं।
......
50 विशिष्ट उत्पाद शामिल
ब्रांड में कुल 50 उत्पादों को शामिल किया गया है। इसमें मोटे अनाजों से बने बेकरी उत्पाद, मुन्स्यारी, चकराता, हर्षिल की राजमा, चौलाई, तुअर दाल, लाल चावल, झंगोरा, गहत, काले भट्ट, चाय, तेल, पर्सनल केयर, हैंडीक्राफ्ट के उत्पाद शामिल हैं। इसके उत्पादों की गुणवत्ता की जांच तीन स्तरों पर की जा रही है। सरकार ने सरकारी कार्यक्रमों व कार्यालयों के जरिए भी बिक्री बढ़ाने की रणनीति तैयार की गई है।
....
तीन हजार से अधिक महिलाएं उत्पादों की जुड़ी
हाउस ऑफ हिमालयाज में अब तक कुल 22 ट्रेडमार्क पंजीकृत किए जा चुके हैं। इन उत्पादों से राज्य की 3,300 से अधिक ग्रामीण महिलाएं प्रत्यक्ष तौर पर जुड़ी हुई हैं। जबकि व्यापक क्रय नेटवर्क के माध्यम से 28 हजार से अधिक महिलाओं को इसका अप्रत्यक्ष लाभ मिला है। देश प्रमुख शहरों में 26 आउटलेट्स के माध्यम से उत्पादों की बिक्री की जा रही है। रिलायंस, फ्रैशपिक, फिलिपकॉर्ट, जैपटो के साथ अनुबंध का प्रयास किया जा रहा है। हाउस ऑफ हिमालयाज के उत्पाद को विदेशी बाजार में उपलब्ध कराने के लिए अमेजोन ग्लोबल, वॉलमॉर्ट के साथ साझेदारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
.......
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकल टू ग्लोबल विजन के अनुसार हाउस ऑफ हिमालयाज का उद्देश्य उत्पादों की गुणवत्ता व पैकेजिंग को सुदृढ़ बनाकर, प्रामाणिक हिमालयी उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रीमियम बाजारों में स्थापित करना है। इससे प्रदेश के किसानों और महिला स्वयं सहायता समूहों की आर्थिकी मजबूत हुई है। - पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री